पीलीभीत। खेती में कुछ नया करने की चाह और सोशल मीडिया से मिली जानकारी ने गजरौला निवासी किसान अमर वीर सिंह को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए प्रेरित किया। पारंपरिक खेती से हटकर उन्होंने चार बीघा जमीन में ड्रैगन फ्रूट का बाग तैयार किया है। खास बात यह है कि ड्रैगन फ्रूट के साथ उन्होंने सहफसली के रूप में पपीते की खेती भी की, जो महज 9 से 10 महीने में तैयार होकर अच्छी उपज दे रही है।
अमर वीर सिंह ने बताया कि उन्होंने 1 अप्रैल 2025 को ड्रैगन फ्रूट की पौध लगाई थी। इसके लिए पौध वह उदय ड्रैगन फ्रूट, किच्छा से लेकर आए। चार बीघा क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए करीब 270 पोल लगाए गए हैं। इस पूरी खेती को तैयार करने में लगभग तीन लाख रुपये की लागत आई है।
पपीते ने भी दिया अतिरिक्त मुनाफे का रास्ता
ड्रैगन फ्रूट के पौधों के बीच खाली स्थान का बेहतर उपयोग करने के लिए अमर वीर सिंह ने सहफसली के रूप में पपीते की खेती की। उनका कहना है कि पपीते की फसल करीब 9 से 10 महीने में तैयार हो गई और अच्छी उपज मिल रही है। इससे ड्रैगन फ्रूट की मुख्य फसल के तैयार होने तक खेत से अतिरिक्त आमदनी का रास्ता भी बना है।
25 साल तक कमाई की उम्मीद
अमर वीर सिंह का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में शुरुआती निवेश जरूर अधिक है, लेकिन लंबे समय में इससे अच्छी आमदनी की उम्मीद है। उन्हें विश्वास है कि एक बार बाग अच्छी तरह तैयार होने के बाद करीब 25 वर्षों तक इससे कमाई की जा सकती है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती की देखरेख में उनके बेटे ऐश वीर सिंह भी लगातार सहयोग कर रहे हैं। पिता-पुत्र की यह पहल क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी आधुनिक और वैकल्पिक खेती की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।
अमर वीर सिंह ने बताया कि उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी जुटाई और इसके बाद प्रयोग के तौर पर चार बीघा में इसकी शुरुआत की। अब पपीते की अच्छी उपज और ड्रैगन फ्रूट के पौधों की बढ़त देखकर उनका उत्साह बढ़ा है।
जिला उद्यान अधिकारी पीलीभीत मृत्युंजय सिंह ने बताया की ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति हेक्टेयर सरकार की ओर से 1लाख 60 हजार का अनुदान दिया जा रहा है जिले के लिए दो हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित है। इच्छुक किसान विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।