हॉलीवुड। फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों क्लासिक फिल्मों के सीक्वल बनाने की होड़ लगी है। इसी कड़ी में साल 2006 की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘द डेविल वियर्स प्राडा’ का सीक्वल दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मेरिल स्ट्रीप और ऐनी हैथवे स्टारर यह फिल्म करीब 20 साल बाद एक बार फिर फैशन और मीडिया जगत की चकाचौंध के पीछे के कड़वे सच को पर्दे पर लेकर आई है।
पुरानी यादें और नए जमाने का संघर्ष
यह फिल्म फ्रेंचाइज लॉरेन वीसबर्गर की मशहूर किताब पर आधारित है, जिसमें उन्होंने ‘वोग’ मैगजीन में काम करने के अपने अनुभवों को साझा किया था। पहली फिल्म जहाँ प्रिंट मीडिया के स्वर्ण युग की कहानी थी, वहीं इसका सीक्वल आज के डिजिटल और ‘इन्फ्लुएंसर’ दौर की चुनौतियों को दिखाता है। समीक्षकों का मानना है कि फिल्म भले ही मूल फिल्म के उस ऐतिहासिक रुतबे को पूरी तरह न छू पाए, लेकिन यह ‘नॉस्टैल्जिया’ (पुरानी यादों) और आधुनिक मीडिया के बदलते स्वरूप का एक शानदार मेल है।
मिरांडा प्रीस्टली: आज भी वही धाक
मेरिल स्ट्रीप ने एक बार फिर मिरांडा प्रीस्टली के अपने आईकॉनिक किरदार में जान फूँक दी है। दो दशक बाद भी उनकी वही तीखी नजरें और सख्त मिजाज दर्शकों को अपनी ओर खींचने में सफल रहता है। फिल्म की कहानी अब तब आगे बढ़ती है जब ‘रनवे’ मैगजीन अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है और मिरांडा को आज के तेजी से बदलते फैशन वर्ल्ड के साथ तालमेल बिठाना पड़ रहा है।
मनोरंजन की कसौटी पर खरी
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टार कास्ट और पुरानी यादें हैं। ऐनी हैथवे और एमिली ब्लंट की मौजूदगी इसे और भी दिलचस्प बनाती है। हालांकि सीक्वल के सामने पहली फिल्म की विशाल सफलता एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अपने शानदार फैशन सेंस, चुटीले डायलॉग्स और गहरी भावनाओं के कारण यह फिल्म दर्शकों का मनोरंजन करने में पूरी तरह सफल रही है।