नई दिल्ली। भविष्य की महामारियों को रोकने की दिशा में भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर एक ऐसा ’अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ (पूर्व चेतावनी प्रणाली) विकसित कर रही है, जो जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों का समय रहते पता लगा सकेगा।
नेशनल वन हेल्थ मिशन (NOHM) की पहलः
यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नेशनल वन हेल्थ मिशन के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका नेतृत्व भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) कर रहा है। मिशन का मुख्य उद्देश्य उन सूक्ष्म जीवों (पैथोजन्स) की पहचान करना और उनकी निगरानी करना है, जो वन्यजीवों या पालतू जानवरों से मानव आबादी में संक्रमण फैला सकते हैं।
AI कैसे करेगा काम?
डेटा विश्लेषणः एआई सिस्टम विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा, जैसे जानवरों की असामान्य मृत्यु दर, पर्यावरणीय बदलाव और क्लिनिकल नमूनों का विश्लेषण करेगा।
पैथोजन ट्रैकिंगः यह उन वायरस और बैक्टीरिया की पहचान करेगा जो भविष्य में ’स्पिलओवर’ (जानवरों से इंसानों में फैलना) की क्षमता रखते हैं।
त्वरित प्रतिक्रियाः किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में यह सिस्टम स्वास्थ्य अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजेगा, जिससे समय रहते रोकथाम की जा सकेगी।
महत्व और आवश्यकताः
कोरोना जैसी महामारियों के अनुभव के बाद, विशेषज्ञ मानते हैं कि 75þ नई संक्रामक बीमारियां जानवरों से ही आती हैं। आईसीएमआर के वैज्ञानिक इस प्रोजेक्ट के जरिए ’वन हेल्थ’ दृष्टिकोण अपना रहे हैं, जिसमें इंसान, जानवर और पर्यावरण तीनों के स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर देखा जाता है।

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