पीलीभीत। यूजीसी रेगुलेशन 2026 को अविलंब लागू करने और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के गिरफ्तार छात्र नेताओं की रिहाई की मांग को लेकर भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने तहसील पूरनपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय आह्वान के तहत आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के पश्चात कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान भाकपा माले के जिला प्रभारी अफरोज आलम ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार को दलितों और पिछड़ों की याद केवल वोट के समय आती है, जबकि धरातल पर उनका लगातार उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं में 118% की वृद्धि हुई है। रोहित वेमुला, पायल तडवी और दर्शन सोलंकी जैसे मेधावी छात्रों की आत्महत्या इसी उत्पीड़न का परिणाम है। श्री आलम ने कहा कि ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से रोक लगी है। उन्होंने मांग की कि यदि मोदी सरकार वास्तव में दलित-पिछड़ा हितैषी है, तो लोकसभा में कानून बनाकर इन रेगुलेशन को लागू करे।
प्रदर्शन में शामिल एडवोकेट लालबहादुर ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में आरक्षण से लेकर एससी/एसटी एक्ट तक सब खतरे में है। उन्होंने 26 फरवरी को दिल्ली पुलिस द्वारा जेएनयू छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की। इस दौरान भाकपा माले की राज्य कमेटी के सदस्य कामरेड सईद खां, ब्लॉक सचिव देवीदयाल, ऐपवा नेता कामरेड मारिया, इलियास, नरेश वर्मा, ओमकार कुशवाहा और एडवोकेट प्रेमपाल सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।