​पीलीभीत। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में जारी की गई बाढ़ प्रभावित जिलों की सूची में पीलीभीत का नाम शामिल न होने पर सियासत गरमा गई है। बुधवार को शहर के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने सरकार और स्थानीय सत्तारूढ़ नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्तर प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की सूची में पीलीभीत का नाम दर्ज नहीं किया गया, तो कांग्रेस बड़े पैमाने पर जन-आंदोलन शुरू करेगी।
​प्रशासन की संवेदनशीलता पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी 44 बाढ़ प्रभावित जिलों (118 तहसीलों) की सूची में पीलीभीत का नाम न होना क्षेत्रीय नेताओं की घोर लापरवाही का प्रमाण है। उन्होंने ‘स्टेट लेवल मॉक एक्सरसाइज ऑन फ्लड रिपोर्ट-2025’ का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में प्रदेश की बाढ़ संबंधी तैयारियों का विस्तृत वर्णन है, लेकिन पीलीभीत जैसे संवेदनशील जिले को इसमें जगह नहीं दी गई है। उन्होंने हैरानी जताई कि रिपोर्ट में गोमती, शारदा और घाघरा नदियों का जिक्र तो है, लेकिन देवहा नदी, जो पीलीभीत में भारी तबाही मचाती है, उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
​बाढ़ से प्रभावित होता है जिले का बड़ा हिस्सा
कुमुद गंगवार ने भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पीलीभीत के चार ब्लॉक—अमरिया, ललौरीखेड़ा, बरखेड़ा और बीसलपुर सीधे तौर पर देवहा नदी के कहर का सामना करते हैं, जबकि पूरनपुर ब्लॉक शारदा और घाघरा नदियों से प्रभावित रहता है। उन्होंने कहा कि बाढ़ की त्रासदी का लंबा इतिहास होने के बावजूद जिले को संवेदनशील सूची से बाहर रखना प्रशासन के ज्ञान और संवेदनशीलता पर ज्वलंत प्रश्न खड़े करता है।
​नेताओं पर लगाया ‘विजन’ की कमी का आरोप
कांग्रेस नेता ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर विषय पर 23 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित स्थानीय सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और क्षेत्रीय विधायकों को पत्र लिखकर अवगत कराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास जनता की समस्याओं के समाधान का कोई विजन नहीं है। कुमुद गंगवार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 की बाढ़ तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है, ऐसे में किसानों और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए पीलीभीत को इस सूची में शामिल करवाना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे जनता के साथ मिलकर सड़कों पर उतरेंगे।

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