पीलीभीत। आर्य समाज, स्टेशन रोड, पीलीभीत में सोमवार से चार दिवसीय वेद-प्रचार उत्सव का शुभारंभ अत्यंत उत्साह एवं श्रद्धा के साथ हुआ। उत्सव के प्रथम दिवस पर आचार्यवीरेंद्र शास्त्री जी के ब्रह्मात्व मेंh वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें एन.एम. सक्सेना, माखनलाल आर्य, वासुदेव गंगवार, महेंद्र कुमार गंगवार तथा धनंजय कुमार गंगवार ने सपत्नीक मुख्य यजमान के रूप में शिरकत की। नगर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने भी यज्ञ कुंड में आहुतियाँ अर्पित कीं। यज्ञ के समापन के उपरांत भजनोपदेशक भानुप्रकाश आर्य ने “प्रभु नाम के अमृत रस का, जो प्राणी पान करेगा” जैसे मधुर और भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति से समूचे प्रांगण को भक्तिमय कर दिया।

उत्सव के दौरान मुख्य वक्ता आचार्य वीरेंद्र शास्त्री ने अपने ओजस्वी प्रवचन में ईश्वर के वास्तविक स्वरूप और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ईश्वर प्राप्ति के लिए मन में सच्ची श्रद्धा और उसके शुद्ध स्वरूप को जानना अत्यंत आवश्यक है। महाभारत काल से पूर्व संपूर्ण मानव जाति एक ही निराकार ईश्वर की उपासना करती थी। प्रकृति की किसी भी वस्तु में ईश्वर की भावना कर लेने से वह वस्तु ईश्वर नहीं बन जाती, इसलिए पाखंड और अंधविश्वास से दूर रहकर सृष्टि के नियमों तथा वेदों के ज्ञान द्वारा अपनी बुद्धि को परिष्कृत करना चाहिए।

कार्यक्रम का सफल संचालन श्री प्रकाशवीर जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर आर्य समाज के मंत्री वासुदेव गंगवार, आचार्य हरीबहादुर आर्य, नरेंद्रमोहन सक्सेना, करुणा शंकर सक्सेना, कृपाशंकर, तेजनरायन आर्य, कृष्ण अवतार कंसल, बसंत लाल, नरेंद्र पाल सिंह, बुद्धसेन गंगवार, बेंचेलाल, सुशीला आर्या, नीलम सिंह, प्रेमवती तथा आर्य कन्या इंटर कॉलेज की शिक्षिकाओं एवं छात्राओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आर्य समाज प्रबंधन के अनुसार यह वेद-प्रचार उत्सव 04 सितंबर तक निरंतर आयोजित किया जाएगा।