पीलीभीत। जिले के परिषदीय स्कूलों में इन दिनों एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहाँ शिक्षक और शिक्षिकाएं अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर एकजुट हुए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में इस चार दिवसीय आंदोलन का बिगुल फूँका है। विरोध के तीसरे दिन जिले के बीसलपुर, बिलसंडा, बरखेड़ा, अमरिया, ललौरी खेड़ा, मरौरी और पूरनपुर सहित सभी विकास खंडों में ब्लॉक अध्यक्षों और मंत्रियों के नेतृत्व में हजारों शिक्षकों ने इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान स्कूलों में उस समय एक भावुक और प्रेरणादायक स्थिति उत्पन्न हो गई, जब नन्हे-मुन्ने छात्र-छात्राओं ने अपने गुरुजी की बांह पर बँधी काली पट्टी को देखकर अपनी जिज्ञासा जाहिर की। बच्चों द्वारा पूछे गए सवाल— “गुरुजी, आपने यह काली पट्टी क्यों बाँधी है?”— का शिक्षकों ने बेहद शालीनता और सकारात्मकता के साथ उत्तर दिया। शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि यह विरोध किसी व्यवस्था के प्रति द्वेष नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए उठाई गई एक शांतिपूर्ण आवाज है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए बताया कि लोकतंत्र में अपनी बात को मर्यादा के साथ रखना भी शिक्षा का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
शिक्षक संगठनों के इस अभियान के तहत दयाशंकर गंगवार, उमेश गंगवार, लाल करन, बाबूराम, देवेन्द्र कन्हैया, राजेश मिश्रा, आराधना कश्यप, मोहम्मद अकरम, अंकित भारती और के.के. सागर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं। आंदोलन में विमल कुमार, जितेन्द्र कुमार, संतोष पासवान, पंकज गंगवार और मुकेश अवस्थी जैसे पदाधिकारियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले चल रहा यह चार दिवसीय विरोध प्रदर्शन कल अपने समापन की ओर बढ़ेगा, जिसमें जिले भर के शिक्षक अपनी मांगों को सरकार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं।
(आधुनिक दुनिया को सभी स्थानों पर संवाददाताओं की आवश्यकता है। इच्छुक संपर्क करें- 8923815100 व्हाट्अप पर अपना नाम, स्थान, यदि कोई अनुभव है तो उसकी जानकारी और कहां से संवाददाता बनना चाहते हैं उस स्थान का नाम लिखें संपर्क करें)