​पीलीभीत। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं के बीच स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत ने हन्टावायरस को लेकर विस्तृत मार्गदर्शिका जारी की है। संस्थान के आईसीयू इंचार्ज डॉ. अरविंद एम ने स्पष्ट किया कि सही जानकारी ही इस वायरस के विरुद्ध सबसे प्रभावी सुरक्षा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और पर्यावरणीय परिवर्तनों के कारण यह विषय पुनः चर्चा में है, लेकिन भारत में घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सतर्कता बरतनी जरूरी है। जलवायु परिवर्तन और बदलती कृषि पद्धतियों के कारण चूहों का मानव बस्तियों की ओर पलायन बढ़ा है, जो इस संक्रमण का मुख्य स्रोत हैं।
​डॉ. अरविंद ने वायरस की प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हन्टावायरस मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों (Rodents) के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने से फैलता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कोविड-19 की तरह सामान्य बातचीत या हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। संक्रमण तब होता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित कणों को सांस के जरिए भीतर लेता है या दूषित सतह को छूने के बाद अपने मुंह या नाक को स्पर्श करता है। हालांकि, एंडीज वायरस जैसे कुछ दुर्लभ प्रकारों में निकट संपर्क से सीमित संक्रमण देखा गया है, परंतु सामान्यतः इसका प्रसार सीमित ही रहता है।
​संक्रमण के लक्षणों को लेकर चिकित्सकों ने आगाह किया है कि इसके शुरुआती संकेत सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं, जिनमें तेज बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द शामिल हैं। यदि उपचार में देरी होती है, तो 4 से 10 दिनों के भीतर स्थिति गंभीर हो सकती है, जिसमें मरीज को सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल वैज्ञानिक तथ्यों पर भरोसा करें।
​बचाव के उपायों पर जोर देते हुए मीडिया प्रभारी डॉ. अरुण सिंह ने ‘सील करें, साफ रखें और नियंत्रण रखें’ का मंत्र साझा किया। उन्होंने सलाह दी कि अनाज के गोदामों और घरों की दरारों को बंद रखें ताकि चूहे प्रवेश न कर सकें। सफाई के दौरान विशेष सावधानी बरतते हुए चूहों की गंदगी को सीधे झाड़ने के बजाय कीटाणुनाशक के छिड़काव के बाद ही साफ करें। यदि किसी व्यक्ति को बुखार के साथ सांस की समस्या हो और उसका संपर्क संभावित संक्रमित क्षेत्रों से रहा हो, तो उसे तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में इसके लिए पर्याप्त आईसीयू और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

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