रूद्रपुर। उधम सिंह नगर जिले की रूद्रपुर अदालत से एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी खबर सामने आ रही है। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजू कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने वर्ष 2022 में हुए खटीमा के बहुचर्चित कुलदीप सिंह हत्याकांड (Kuldeep Singh Murder Case) में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का गहनता से परीक्षण करने के बाद मुख्य आरोपी बलजीत सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड के लिए दोषी बलजीत सिंह उर्फ सोनू को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सख्त सजा सुनाई है, साथ ही उस पर 18 हजार रुपये का अर्थदण्ड (जुर्माना) भी लगाया है।
खेत पर गन्ना भरने के दौरान हुआ था जानलेवा हमला
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) दीपक कुमार अरोड़ा ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह खौफनाक वारदात 7 मार्च 2022 को हुई थी। ग्राम फुलैया, खटीमा निवासी निर्मल सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका बेटा कुलदीप सिंह ट्रैक्टर-ट्राली लेकर अपने खेत पर गन्ना भरने गया था। उसी समय वहां पहले से ही ग्राम गोगी (नानकमत्ता) निवासी हरविन्दर सिंह ट्रैक्टर से खेत जोत रहा था, जबकि उसका नौकर नत्थू लाल हाथ में तलवार और बलजीत सिंह उर्फ सोनू अवैध तमंचा लेकर घात लगाए खड़े थे। जैसे ही कुलदीप सिंह वहां पहुँचा, इन सभी आरोपियों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया।
जान बचाने के लिए भागते युवक को दौड़ाकर मारी थी गोली
अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के मुताबिक, आरोपियों द्वारा लहूलुहान किए जाने के बाद कुलदीप अपनी जान बचाने के लिए खेत से बाहर की तरफ भागा। इसी दौरान आरोपी बलजीत सिंह उर्फ सोनू ने हाथ में लिए तमंचे से कुलदीप पर ताबड़तोड़ कई राउंड फायर झोंक दिए। गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए कुलदीप सिंह ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट न्यायालय में पेश की थी।
13 गवाहों की गवाही से सिद्ध हुआ गुनाह, मिली उम्रकैद
इस संवेदनशील मामले की लंबी सुनवाई प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.के. श्रीवास्तव की अदालत में चली। अभियोजन पक्ष की ओर से ए.डी.जी.सी. दीपक कुमार अरोड़ा ने बेहद मजबूती से पैरवी करते हुए अदालत के सामने कुल 13 चश्मदीद और महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। इन गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट में आरोपी बलजीत सिंह के खिलाफ दोष पूरी तरह सिद्ध हो गया। न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी को सलाखों के पीछे भेजने का आदेश जारी किया, जिससे पीड़ित परिवार को 4 साल बाद न्याय मिल सका है।