रांची। झारखंड में नक्सलवाद और उग्रवाद के खात्मे की दिशा में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबियों में से एक हाथ लगी है। राजधानी रांची के धुर्वा स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के 25 हार्डकोर नक्सलियों और जेजेएमपी (JJMP) के दो कुख्यात उग्रवादियों ने एक साथ अपने हथियार डाल दिए। मुख्यधारा में लौटने वाले इन नक्सलियों में से आठ ऐसे शीर्ष कमांडर शामिल हैं, जिन पर सरकार की ओर से कुल 33 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के सामने इस सामूहिक सरेंडर को राज्य में लाल आतंक की कमर टूटने के रूप में देखा जा रहा है।

33 लाख के इनामी नक्सलियों पर दर्ज हैं 426 संगीन मामले, सौंपे घातक हथियार
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों का इतिहास बेहद खौफनाक रहा है और इनके खिलाफ अलग-अलग थानों में हत्या, लेवी (वसूली) और पुलिस पर हमले जैसे कुल 426 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। मुख्यधारा से जुड़ने की कसम खाते हुए इन नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के आला अधिकारियों के सामने अत्याधुनिक हथियारों का बड़ा जखीरा सौंप दिया। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने लाइट मशीन गन (LMG), इंसास (INSAS), एसएलआर (SLR) राइफल्स, घातक पिस्तौल, दर्जनों मैगजीन और करीब 3,000 जिंदा कारतूसों सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद पुलिस के हवाले किया।

सरकारी नीति से प्रभावित होकर लिया फैसला, पुनर्वास का मिला भरोसा
झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्र ने इस सफल अभियान की सराहना करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी पूर्व नक्सलियों और उग्रवादियों को सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति (Surrender and Rehabilitation Policy) का पूरा लाभ दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इन सभी के बेहतर पुनर्वास और उनकी जायज मांगों को पूरा करने की दिशा में प्रशासन तेजी से कदम उठाएगा। वहीं, एडीजी (ऑपरेशन) मनोज कौशिक ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर ही इन नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का बड़ा फैसला लिया है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की शुरुआत में पुलिस और सुरक्षा बलों के उन वीर जवानों को भी भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने नक्सली मोर्चे पर देश के लिए अपनी शहादत दी थी।


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