पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों की बढ़ती आबादी के साथ ही आसपास के ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को थामने के लिए वन विभाग ने एक बड़ी व अनूठी पहल की है। वन विभाग अब जिले के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षकों को ढाल बनाकर बच्चों और ग्रामीणों के बीच व्यापक जनजागरूकता फैलाएगा। इसके लिए जिले के प्रत्येक विकास खंड से 40-40 शिक्षकों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में तैयार करने की योजना बनाई गई है।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) मनीष सिंह ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर सभी ब्लॉकों से शिक्षकों को नामित कर उनकी सूची जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। वर्ष 2014 में स्थापित पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लगातार संरक्षण प्रयासों के चलते वन्यजीवों के कुनबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, जंगलों की सीमाओं से सटे गांवों और कृषि क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय निवासियों के साथ टकराव की घटनाओं में इजाफा हुआ है।
वन विभाग का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष पर प्रभावी नियंत्रण पाने में स्कूली छात्र-छात्राओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है। जिले के लगभग 1,500 विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे 1,65,000 छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर ग्रामीण परिवारों से जुड़े हैं। मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित शिक्षक इन बच्चों को वन्यजीवों के व्यवहार, जंगल के आसपास सतर्कता बरतने के तरीकों और आपात स्थिति में बचाव के उपायों की जानकारी देंगे, जिससे यह संदेश प्रत्येक ग्रामीण घर तक पहुंच सके।