पीलीभीत। कर्तव्यनिष्ठा और निस्वार्थ सेवा जब व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है, तो वह समाज के लिए मिसाल बन जाती है। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है जनपद के थाना गजरौला क्षेत्र के ग्राम खाग निवासी 53 वर्षीय लाल बहादुर कौशल ने। डायल-112 में चालक के पद पर तैनात लाल बहादुर को उनकी विशिष्ट सेवाओं और ईमानदारी के लिए होमगार्ड विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके तीन दशकों के संघर्ष और कठिन परिश्रम का प्रतिफल है।
​साधारण परिवार से निकलकर असाधारण पहचान तक का सफर
एक साधारण किसान परिवार में जन्मे लाल बहादुर कौशल के कंधों पर बचपन से ही बड़ी जिम्मेदारियां थीं। पिता राम भरोसे लाल और माता सोवरनी देवी के सात बच्चों में सबसे बड़े लाल बहादुर ने खेती-किसानी के साथ अपनी शिक्षा जारी रखी। राजकीय ड्रमण्ड इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट करने के बाद, उन्होंने वर्ष 1996 में होमगार्ड के रूप में पूरनपुर थाने से अपने करियर की शुरुआत की। वर्ष 2016 में डायल-112 सेवा शुरू होने पर उन्हें चालक के रूप में नई जिम्मेदारी मिली, जिसे उन्होंने पूरी तत्परता से निभाया।


​सड़क हादसों में देवदूत बनकर बचाईं दर्जनों जिंदगियां
डायल-112 पर तैनाती के दौरान लाल बहादुर कौशल की पहचान एक ऐसे सिपाही के रूप में बनी, जो समय की परवाह किए बिना घटनास्थल पर पहुँचता है। हाईवे पर होने वाले सड़क हादसों में उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी का उपयोग करते हुए दर्जनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुँचाया, जिससे कई लोगों की जान बच सकी। उनकी इसी मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के कारण विभाग ने उन्हें इस गौरवपूर्ण सम्मान से नवाजा है।
​सेवाभावी है पूरा परिवार
लाल बहादुर का परिवार भी समाज के प्रति समर्पित है। उनके छोटे भाई महेश कौशल जहाँ शिक्षक और पत्रकार के रूप में समाज को जागरूक कर रहे हैं, वहीं सबसे छोटे भाई राजकुमार कौशल ग्राम प्रधान के रूप में गांव के विकास में जुटे हैं। सम्मान मिलने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लाल बहादुर ने कहा, “यह सम्मान विभाग और जनता के विश्वास की जीत है। जब तक शरीर पर वर्दी है, मानवता की सेवा ही मेरा एकमात्र धर्म है।” उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र के लोगों और विभाग के साथियों ने उन्हें बधाई दी है।

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