​पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व अब तराई के अन्नदाताओं के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। नेपाल की गौरी फंटा सेंचुरी से आए प्रवासी हाथियों ने माला रेंज को अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है, जिसके चलते किसान रात-भर दहशत में रहने को मजबूर हैं। बीती रात माला रेंज से निकले दो हाथियों ने महुआ और सिरसा सरदाह गौटिया गांव के दो दर्जन से अधिक किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल रौंद डाली।
​रात भर फसलों को रौंदते रहे हाथी, सोता रहा विभाग
ग्रामीणों का आरोप है कि रात भर हाथी खेतों में सरसों, मसूर, मटर और गन्ने की फसलें तहस-नहस करते रहे, लेकिन वन विभाग की नींद नहीं टूटी। महुआ गांव के किसान राकेश बाबू के सिंचाई बोरिंग को भी हाथियों ने उखाड़ फेंका। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की गश्त केवल कागजों तक सीमित है, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।


​विधायक ने जताई नाराजगी, रेंजर को हटाने की मांग
बरखेड़ा विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने इस बर्बादी पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने सीधे तौर पर माला रेंजर रोबिन सिंह पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी कार्यशैली के कारण हाथी जंगल के अंदर नहीं जा रहे हैं। विधायक ने कहा, “किसानों का नुकसान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैं इस मामले की शिकायत वन मंत्री से करूंगा और रेंजर को हटाने के लिए पत्राचार किया जाएगा।”
​मुआवजे की प्रक्रिया शुरू
मामला तूल पकड़ते देख वन दरोगा अमित कुमार ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। डिप्टी रेंजर शेर सिंह ने बताया कि हाथियों द्वारा किए गए नुकसान की सूची तैयार कर राजस्व विभाग को भेजी जा रही है, ताकि आकलन के बाद किसानों को उचित मुआवजा मिल सके। साथ ही रात्रि गश्त बढ़ाने का भी आश्वासन दिया गया है।


​इन किसानों का हुआ भारी नुकसान:
प्रभावित होने वाले किसानों में मुख्य रूप से पार्वती, जय देवी, गौरी शंकर, वीर बहादुर, खूबचंद, गंगाराम, रोशन लाल, राधेश्याम, सुरेश कुमार, नोखेलाल, मंगली प्रसाद, भगवान दास, हीरालाल, रामऔतार, केसरी लाल, बाबूराम, राजेंद्र कुमार, झम्मन लाल, हुलासी राम, राम कुमार, तेजराम, राम सिंह, महेंद्र पाल, हरिशंकर, अजय वीर, राकेश बाबू, सावित्री देवी और चमेली देवी शामिल हैं।

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