पीलीभीत।भरा पचपेड़ा क्षेत्र में दशकों से बसे भूमिहीन गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई और उन्हें उजाड़ने की धमकियों के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर समस्या को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेताओं ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने के बाद जिलाधिकारी से भेंट की। भाकपा माले के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को संबोधित एक चार सूत्रीय मांग पत्र अपर जिलाधिकारी न्यायिक रोशनी यादव को सौंपते हुए स्पष्ट किया कि यदि इन विस्थापितों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना कोई भी दंडात्मक कार्रवाई की गई, तो पार्टी बड़े पैमाने पर जन आंदोलन शुरू करेगी।
भाकपा माले ने सरकार और प्रशासन के सामने प्रमुख शर्तें रखते हुए मांग की है कि भरा पचपेड़ा में आबाद गरीबों को दूसरी जगह बसाए बगैर वहां से न हटाया जाए। पार्टी ने प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए आबादी हेतु कम से कम पांच डिस्मिल जमीन, पक्का आवास, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और विस्थापन क्षतिपूर्ति के रूप में दो लाख रुपये का मुआवजा देने की पुरजोर वकालत की है। नेताओं का तर्क है कि दशकों से रह रहे इन लोगों को बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के हटाना मानवीय अधिकारों का उल्लंघन है।
जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद भाकपा माले के जिला सचिव देवाशीष राय ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बिना नोटिस दिए और बिना पुनर्वास के गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाना वर्तमान सरकार के गरीब विरोधी चेहरे को उजागर करता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता के अहंकार में हर जगह बुलडोजर चलाने वाली सरकार को याद रखना चाहिए कि जब जनता का ‘बुलडोजर’ चलेगा तो सरकार टिक नहीं पाएगी। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में जिला प्रभारी अफरोज आलम, एडवोकेट शम्स विकास और किसान महासभा के नेता मनोहर लाल वर्मा प्रमुख रूप से शामिल रहे।
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