बरेली। शहर के सीबीगंज इलाके में स्थित सुपीरियर शराब फैक्ट्री (डिस्टिलरी) में पिछले तीन दिनों से आयकर विभाग की टीम ने फैक्ट्री के अंदर डेरा डाल रखा है और अब तो जांच मालिक /निदेशक के आशियाने तक भी पहुँच गई है।
आयकर विभाग की टीम किसी छोटी-मोटी गड़बड़ी की तलाश में नहीं है। सूत्रों की मानें तो अधिकारियों ने साल 2003 से अब के सारे लेन-देन के दस्तावेज अपनी मेज पर सजा लिए हैं। 23 सालों के इस लंबे सफर में कहां-कहां ’रुपयों का खेल’ हुआ और कितनी टैक्स चोरी की गई, इसकी बारीकी से पैमाइश की जा रही है
सिर्फ कागजात ही नहीं, बल्कि फैक्ट्री के लैपटॉप, कंप्यूटर और यहां तक कि अधिकारियों के मोबाइल फोन भी अब सरकारी कब्जे में हैं। विभाग को शक है कि करोड़ों रुपये की हेराफेरी को डिजिटल फाइलों के पीछे छुपाया गया है। टीम एक-एक फाइल और डिलीट किए गए डेटा को खंगाल रही है ताकि ’काली कमाई’ का सच सामने आ सके।
कार्रवाई इतनी सख्त है कि फैक्ट्री निदेशक के आवास को भी घेरे में ले लिया गया है। फैक्ट्री के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा है। बरेली के कारोबारी जगत में इस छापेमारी ने खलबली मचा दी है।