पीलीभीत। ​पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (इको-सेंसटिव जोन) को घोषित करने की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से लंबित इस प्रक्रिया में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कुछ तकनीकी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिसके कारण अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो पा रही थी। इन बाधाओं को दूर करने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने हाल ही में दिल्ली का दौरा किया और मंत्रालय के समक्ष वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए सभी आपत्तियों का प्रभावी ढंग से निस्तारण करा दिया है। इस विकासक्रम के बाद अब यह माना जा रहा है कि केंद्र सरकार शीघ्र ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व के इको-सेंसटिव जोन की आधिकारिक घोषणा कर देगी।
​इको-सेंसटिव जोन की घोषणा में हो रही देरी का सीधा असर जंगल के आसपास के पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ता दिखाई दे रहा है। आधिकारिक नियमों और सीमाओं के स्पष्ट न होने के चलते टाइगर रिजर्व से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों की बाढ़ आ गई है। यहाँ बहुत तेजी के साथ बड़े-बड़े रिजॉर्ट और होम-स्टे का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और गलियारों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ गया है। इन अनियंत्रित निर्माण कार्यों को लेकर मामला अब राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की चौखट तक भी जा पहुँचा है, जहाँ अवैध रिजॉर्ट्स और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन को लेकर सुनवाई लंबित है।
​प्रशासन द्वारा इस बार इको-सेंसटिव जोन के लिए जंगल की सीमा से 2 किलोमीटर तक के क्षेत्र का प्रस्ताव तैयार किया गया है। पूर्व में आपत्तियों और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस दायरे को तर्कसंगत बनाने पर जोर दिया गया था। आधिकारिक घोषणा होने के बाद जंगल के किनारे हो रहे अवैध निर्माणों पर न केवल अंकुश लगेगा, बल्कि वहां संचालित होने वाली व्यवसायिक गतिविधियों को भी विनियमित किया जा सकेगा। वनाधिकारी मनीष सिंह के प्रयासों से मिली इस क्लीयरेंस के बाद अब वन विभाग और पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद है कि संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर एक सुरक्षा कवच (बफर लेयर) तैयार हो सकेगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी और टाइगर रिजर्व का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Site designed and maintained by Lalit Rastogi