देहरादून। उत्तराखंड में शुक्रवार को राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में हुई भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश ने कृषि और बागवानी क्षेत्र को नई संजीवनी दी है। इस बदलाव से सूखे की मार झेल रहे किसानों और बागवानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है।

रबी की फसलों को मिला जीवनदान

इस साल सर्दियों के सीजन में बारिश न होने के कारण निचले इलाकों में रबी की फसलों (गेहूं, सरसों, जौ आदि) पर संकट मंडरा रहा था। नमी की कमी के कारण फसलें सूखने के कगार पर थीं, लेकिन अब हुई बारिश ने फसलों को नया जीवनदान दिया है, जिससे बेहतर पैदावार की उम्मीद जगी है।

सेब बागानों के लिए ‘सफेद सोना’ बनी बर्फबारी

ऊंचाई वाले इलाकों के बागवानों के लिए यह बर्फबारी किसी वरदान से कम नहीं है। सेब की फसल में ‘फ्रूट सेटिंग’ (फलों का जमना) और चिलिंग ऑवर (ठंडक की जरूरत) के लिए बर्फबारी अनिवार्य होती है। काफी समय से बर्फ न गिरने के कारण बागवान उत्पादन ठप्प होने की आशंका से चिंतित थे, जो अब दूर हो गई है।

पर्यटन और पर्यावरण को भी लाभ

बारिश और बर्फबारी से न केवल कृषि क्षेत्र को लाभ हुआ है, बल्कि इससे जंगलों की आग (वनाग्नि) का खतरा कम हुआ है और प्राकृतिक जल स्रोतों के रिचार्ज होने में भी मदद मिलेगी। बर्फबारी के बाद अब आने वाले दिनों में पर्यटन में भी उछाल आने की संभावना जताई जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *