विधि संवाददाता,​ पीलीभीत। शिक्षा विभाग में हुए करीब एक करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित घोटाले के मामले में जनपद सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार की अदालत ने मुख्य आरोपी के पुत्र और दो महिला आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सशर्त स्वीकार कर ली हैं। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद तशबिया शम्सी, वामीक शम्सी और गुलनाज फखरुद्दीन को राहत देते हुए उनकी अग्रिम जमानत मंजूर की, हालांकि इसके साथ ही अदालत ने उन पर कई सख्त शर्तें भी लागू की हैं।
​मामले के अभियोजन कथानक के अनुसार, इस पूरे घोटाले को लेकर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) राजीव कुमार ने थाना कोतवाली में एक तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि जनता टेक्निकल कॉलेज बीसलपुर में कार्यरत इलहाम उर रहमान शम्सी विगत कई वर्षों से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पीलीभीत में वेतन बिल और टोकन जनरेशन आदि का कार्य देख रहा था। इस दौरान उसने पद का दुरुपयोग करते हुए और कूटरचित तरीके से सरकारी खजाने में सेंध लगाई। उसने वेतन मद से कुल 1,01,95,135 रुपये (एक करोड़ एक लाख पचानवे हजार एक सौ पैंतीस रुपये) की भारी-भरकम धनराशि अवैध रूप से अपनी पत्नी अर्शी खातून के खाते में हस्तांतरित कर सरकारी धन का गबन कर लिया था।
​इस मामले के प्रकाश में आने के बाद मुख्य आरोपी इलहाम उर रहमान शम्सी के पुत्र वामीक शम्सी (निवासी मोहल्ला फीलखाना, थाना कोतवाली), तशबिया शम्सी तथा नई दिल्ली के ओखला जामिया नगर विस्तार निवासी गुलनाज फखरुद्दीन की ओर से गिरफ्तारी से बचने के लिए जनपद सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार के न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिकाएं दाखिल की गई थीं। सुनवाई के दौरान जहां अभियोजन पक्ष ने अपराध को गंभीर बताते हुए जमानत का विरोध किया, वहीं बचाव पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं।
​अदालत ने तीनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं को सशर्त स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि वे न्यायालय में प्रत्येक नियत तिथि पर स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित होंगे। इसके साथ ही आरोपी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मामले के तथ्यों से जुड़े किसी भी व्यक्ति को कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन नहीं देंगे, जिससे कि वे अदालत में तथ्यों को प्रकट करने से पीछे हटें। कोर्ट ने यह भी शर्त रखी है कि तीनों आरोपी न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत देश नहीं छोड़ेंगे और भविष्य में इस तरह के किसी भी अन्य वित्तीय या आपराधिक मामले में संलिप्त नहीं होंगे। इन सभी शर्तों का उल्लंघन करने पर उनकी जमानत निरस्त की जा सकती है।

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