-दुकानें बंद रहने से मरीज और तीमारदार दिनभर रहे परेशान, -केमिस्ट एसोसिएशन ने फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन और होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की उठाई मांग
पीलीभीत। अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और बिना वैध ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी के विरोध में बुधवार को पीलीभीत जिले के समस्त केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखकर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट उत्तर प्रदेश के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन के माध्यम से स्थानीय दवा व्यापारियों ने सरकार की नीतियों के प्रति कड़ा रोष व्यक्त किया। जिला केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन, पीलीभीत के बैनर तले एकजुट हुए दवा विक्रेताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को सौंपा। केमिस्टों की इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते जिले भर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं और जरूरी दवाओं के लिए मरीजों व उनके तीमारदारों को दिनभर भटकना पड़ा।

आंदोलन के तहत जिला अध्यक्ष विनोद तिवारी के नेतृत्व में भारी संख्या में दवा विक्रेता और पदाधिकारी सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत डोरीलाल फाटक स्थित लक्ष्मी टॉकीज के पास एकत्रित हुए। यहाँ सभी व्यापारियों ने अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधकर सरकार की नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके बाद पदाधिकारी और सदस्य ई-रिक्शों पर सवार होकर नारेबाजी करते हुए लक्ष्मी टॉकीज से रवाना हुए। यह विरोध मार्च गैस चौराहा, थाना सुनगढ़ी चौराहा, गांधी स्टेडियम रोड, गोहनिया चौराहा, नेहरू पार्क तिराहा और नकटादाना चौराहा व कचहरी तिराहा होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा। पूरे रास्ते दवा विक्रेता ऑनलाइन दवा कंपनियों की मनमानी के खिलाफ गगनभेदी नारे लगाते रहे। कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को मांग पत्र प्रेषित किया।

ज्ञापन के माध्यम से दवा विक्रेताओं ने कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट वैधानिक प्रावधान न होने के बावजूद विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियां वर्षों से स्थापित नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रही हैं। केमिस्टों ने उल्लेख किया कि कोविड-19 महामारी जैसी असाधारण और आपातकालीन परिस्थितियों में जारी की गई अंतरिम नियमावली का वर्तमान में बड़े कॉर्पोरेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल आम जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि देश के लाखों छोटे और खुदरा केमिस्टों के अस्तित्व व रोजगार पर भी गहरा संकट खड़ा हो गया है। एसोसिएशन ने पुरजोर मांग की है कि फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन (डॉक्टर के पर्चे) के जरिए होने वाली दवाओं की होम डिलीवरी पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और ऑनलाइन कंपनियों द्वारा बाजार को प्रभावित करने के लिए अपनाई जा रही ‘डीप डिस्काउंटिंग’ (भारी छूट) व ‘प्रेडेटरी प्राइसिंग’ (औने-पौने दाम) की जनविरोधी नीतियों पर तुरंत रोक लगाई जाए।

एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष विनोद तिवारी और महामंत्री आलोक बंसल ने संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए कहा कि देशभर के केमिस्ट और दवा विक्रेता देश की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की मजबूत रीढ़ हैं। कोरोना काल की विभीषिका में भी इन दुकानदारों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार द्वारा उनकी वैध मांगों पर कोई ठोस और प्रभावी कार्यवाही नहीं की जा रही है। दवा विक्रेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अवैध ऑनलाइन बिक्री और जीवनरक्षक दवाओं के अनियंत्रित वितरण पर सरकार ने जल्द ही हस्तक्षेप कर कठोर दंडात्मक कदम नहीं उठाए, तो वे भविष्य में अनिश्चितकालीन तालाबंदी जैसा और भी कड़ा रुख अपनाने को मजबूर होंगे।
इस व्यापक आंदोलन और कलेक्ट्रेट प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से शिवहरि अग्रवाल, मधुकर सिंह और सचिन अग्रवाल सहित भारी संख्या में स्थानीय दवा व्यापारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही दवा विक्रेताओं के इस न्यायोचित आंदोलन को समर्थन देने के लिए यूपीएमएसआरआई (UPMSRI) यूनिट पीलीभीत के पदाधिकारी भी मैदान में उतरे, जिनमें हितेश शुक्ला, आशीष दीक्षित, दलजीत सिंह, कशिश तिवारी, विकास गंगवार, हरिंदर सिंह, विशाल मिश्रा, रवि प्रकाश और आयुष तिवारी आदि साथी प्रमुख रूप से मौजूद रहे और एकजुटता प्रकट की।