अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के एक सेवादार ने ईमानदारी की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है, जिसने न सिर्फ मानवता का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है बल्कि रामनगरी की साख को और मजबूत किया है। मंदिर के सेवादार ध्रुवेश मिश्रा ने सड़क पर गिरी मिली ₹20 लाख मूल्य की हीरे जड़ित चेन को कड़ी सुरक्षा पड़ताल के बाद उसके असली मालिक को सुरक्षित सौंप दिया। यह कीमती चेन मुजफ्फरनगर की रहने वाली एक महिला श्रद्धालु की थी, जिसके लिए यह आभूषण उनके दिवंगत पति की आखिरी और सबसे भावुक निशानी थी।
अमावा मंदिर के पास लावारिस मिली थी चेन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरनगर निवासी निर्मला देवी (पत्नी स्वर्गीय मोहन कुमार) अयोध्या धाम में दर्शन-पूजन के लिए आई थीं। हनुमानगढ़ी मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध अमावा मंदिर के पास अचानक उनकी ₹20 लाख की कीमती हीरे की चेन गले से गिरकर सड़क पर खो गई। इसी दौरान वहाँ से गुजर रहे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के सेवादार ध्रुवेश मिश्रा की नजर सड़क पर पड़ी इस चमचमाती चेन पर गई।
PFC कार्यालय से कराई गई मुनादी
कीमती चेन मिलने के बाद सेवादार ध्रुवेश मिश्रा ने जरा भी लालच नहीं दिखाया। वे बिना समय गंवाए सीधे पैसेंजर फैसिलिटेशन सेंटर (PFC) कार्यालय पहुंचे और वहां ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके तुरंत बाद PFC कार्यालय के लाउडस्पीकर से क्षेत्र में चेन खोने और मिलने को लेकर लगातार अनाउंसमेंट कराई गई।
पति की आखिरी निशानी पाकर रो पड़ीं निर्मला देवी
लाउडस्पीकर पर हुई घोषणा को सुनकर बदहवास हालत में महिला श्रद्धालु निर्मला देवी PFC कार्यालय पहुंचीं। वहां उपस्थित पुलिस प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के जिम्मेदारों ने महिला से कड़ी पूछताछ की और चेन की पहचान से जुड़े पुख्ता साक्ष्य जुटाए। पूर्ण रूप से संतुष्ट होने के बाद पुलिस की मौजूदगी में ₹20 लाख की वह चेन निर्मला देवी को सौंप दी गई।
अपनी खोई हुई चेन को वापस पाकर निर्मला देवी बेहद भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने बताया कि इस चेन की वित्तीय कीमत भले ही ₹20 लाख है, लेकिन उनके लिए इसका भावनात्मक मूल्य करोड़ों से बढ़कर था, क्योंकि यह उनके दिवंगत पति की अंतिम निशानी थी। उन्होंने सेवादार ध्रुवेश मिश्रा की ईमानदारी और अयोध्या प्रशासन की तत्परता का रोते हुए बार-बार आभार व्यक्त किया।
हर तरफ हो रही ध्रुवेश मिश्रा की सराहना
इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर अयोध्या के स्थानीय गलियारों तक सेवादार ध्रुवेश मिश्रा की सच्चाई और निस्वार्थ सेवा भाव की जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि ध्रुवेश जैसे सच्चे रामभक्त ही अयोध्या की पावन संस्कृति और ‘अतिथि देवो भव:’ के संकल्प को धरातल पर चरितार्थ कर रहे हैं।