पीलीभीत। विरासत अगर सीख देने वाली हो तो नई पीढ़ी उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचा देती है। पीलीभीत के राजघराने से जुड़े युवा उद्योगपति और उन्नत किसान आयुष अग्रवाल इसकी एक मिसाल बनकर सामने आए हैं। दादा स्वर्गीय राजा रामनाथ से मिली खेती की सीख और पिता स्वर्गीय आदित्य अग्रवाल से मिली कार्यशैली को उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ा और खेती को महज परंपरागत काम न मानकर लाभकारी व्यवसाय का स्वरूप दे दिया।
पकड़िया नौगवां स्थित फार्म हाउस पर पॉलीहाउस, हाईटेक नर्सरी और आधुनिक बागवानी के जरिए किए जा रहे प्रयोग अब किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। रंगीन शिमला मिर्च की पहली ही फसल में प्रति एकड़ करीब 25 से 30 लाख रुपये का उत्पादन हासिल कर आयुष अग्रवाल ने आधुनिक खेती की संभावनाओं को सामने रखा है। दो एकड़ क्षेत्र में विकसित दो पॉलीहाउस से करीब 50 से 60 लाख रुपये का उत्पादन हासिल हुआ।
राजघराने की विरासत में उद्योग के साथ खेती का संस्कार
पीलीभीत के राजघराने का इतिहास केवल राजसी विरासत तक सीमित नहीं रहा। परिवार ने क्षेत्र के औद्योगिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास में भी योगदान दिया। आयुष अग्रवाल के दादा स्वर्गीय राजा रामनाथ ललित हरि चीनी मिल से जुड़े रहे। चीनी मिल के माध्यम से पीलीभीत सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को रोजगार के अवसर मिले और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति मिली।
राजघराने की ओर से शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में भी योगदान रहा है। यही कारण है कि परिवार की पहचान पीलीभीत के इतिहास और विकास से गहराई से जुड़ी हुई है। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए आयुष अग्रवाल ने उद्योग के साथ कृषि को भी अपनाया। हालांकि उन्होंने खेती को पुराने तौर-तरीकों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने तय किया कि खेत में वही तकनीक उतारी जाए, जो उत्पादन बढ़ाए, लागत को नियंत्रित करे और किसान की आय में वास्तविक वृद्धि करे।

पहली फसल ने दिखाया आधुनिक खेती का दम
पकड़िया नौगवां स्थित फार्म हाउस पर करीब एक-एक एकड़ क्षेत्र में दो पॉलीहाउस विकसित किए गए हैं। नियंत्रित वातावरण में रंगीन शिमला मिर्च की खेती का प्रयोग किया गया। परिणाम उम्मीद से बेहतर रहे।
पहली ही फसल में प्रति एकड़ करीब 25 से 30 लाख रुपये का उत्पादन हासिल हुआ। दो एकड़ के पॉलीहाउस से 50 से 60 लाख रुपये के उत्पादन ने इस मॉडल की क्षमता को साबित किया। यही वजह है कि यह फार्म हाउस अब केवल उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि आधुनिक खेती का उदाहरण बनता जा रहा है। आयुष अग्रवाल के अनुसार खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसान को मौसम और परंपरागत अनुभव के साथ तकनीक, बाजार, पौध की गुणवत्ता, फसल प्रबंधन और बिक्री व्यवस्था को भी समझना होगा। उनका जोर ऐसी खेती पर है जिसमें उत्पादन के साथ बाजार की मांग का भी ध्यान रखा जाए।
महावीर सिंह की निगरानी में हो रहा फसल प्रबंधन
फार्म हाउस की आधुनिक कृषि व्यवस्था में ग्रोइंग मैनेजर महावीर सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका है। पॉलीहाउस में पौधों की देखभाल, फसल प्रबंधन, उत्पादन की निगरानी और विभिन्न कृषि प्रयोगों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का काम उनकी देखरेख में हो रहा है। फार्म पर वर्तमान में अगले फसल चक्र की तैयारी चल रही है। पॉलीहाउस में खीरे की फसल लगाने की तैयारी है, जबकि हाईटेक नर्सरी में शिमला मिर्च समेत विभिन्न सब्जियों की पौध तैयार की जा रही है।
एक फार्म हाउस, खेती के कई प्रयोग
आयुष अग्रवाल का फार्म हाउस केवल पॉलीहाउस तक सीमित नहीं है। यहां आधुनिक सब्जी उत्पादन के साथ फलदार बागवानी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। चीकू, नारंगी और संतरा समेत कई फलदार पौधे लगाए गए हैं।
फार्म पर ड्रैगन फ्रूट की फसल भी तैयार है और इसकी दो बार तुड़ाई हो चुकी है। अमरूद की भी अच्छी पैदावार मिल रही है। यानी एक ही फार्म पर सब्जियों, फलदार पौधों और हाईटेक नर्सरी के जरिए खेती के अलग-अलग मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।
खेती में निहारिका की भी दिलचस्पी
आयुष अग्रवाल की पत्नी निहारिका अग्रवाल भी खेती में गहरी रुचि रखती हैं। फार्म हाउस पहुंचने पर वह फसलों की स्थिति और उत्पादन की जानकारी लेती हैं। परिवार की नई पीढ़ी में खेती के प्रति यह लगाव राजघराने की कृषि परंपरा को आगे बढ़ाने का संकेत भी है।
मुख्यमंत्री कर चुके हैं सम्मानित
आधुनिक एवं नवाचारी खेती के क्षेत्र में आयुष अग्रवाल के प्रयासों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। पॉलीहाउस खेती में मिली सफलता ने यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक को अपनाकर खेती को बेहतर आमदनी के साधन के रूप में विकसित किया जा सकता है।
अब किसानों के लिए खुलेगा आधुनिक खेती का दरवाजा
फार्म हाउस की सबसे बड़ी योजना अब इसे कृषि पर्यटन एवं प्रशिक्षण हब के रूप में विकसित करने की है। ग्रोइंग मैनेजर महावीर सिंह ने बताया कि जल्द ही किसानों के लिए यहां आधुनिक खेती का निशुल्क प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी है.किसान यहां आकर केवल खेती देखेंगे नहीं, बल्कि पॉलीहाउस के अंदर फसल उत्पादन, हाईटेक नर्सरी में पौध तैयार करने की प्रक्रिया, फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों को करीब से समझ सकेंगे। खेती की वे बारीकियां, जो अक्सर किसान केवल सुनते हैं, उन्हें यहां प्रत्यक्ष रूप से देखकर सीखने का अवसर मिलेगा।

खेत बनेगा किसानों की पाठशाला
इस पहल के पीछे सोच साफ है—फार्म हाउस को किसानों की पाठशाला बनाना। महावीर सिंह के मुताबिक किसानों को आधुनिक तकनीक की जानकारी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपने खेतों में नई तकनीकों का प्रयोग कर उत्पादन और आमदनी बढ़ा सकें। यहां सफल फसलों को मॉडल के रूप में किसानों के सामने रखा जाएगा। पॉलीहाउस, हाईटेक नर्सरी, सब्जी उत्पादन, ड्रैगन फ्रूट और फलदार बागवानी के जरिए किसानों को अलग-अलग संभावनाओं से परिचित कराया जाएगा।
विरासत से निकला संदेश
खेती सम्मान और समृद्धि दोनों का रास्ता
आयुष अग्रवाल की कहानी केवल एक सफल किसान की कहानी नहीं है। यह उस सोच का उदाहरण है, जिसमें पुरानी पीढ़ी से मिली सीख को नई तकनीक के साथ जोड़कर भविष्य की राह तैयार की जाती है।
राजघराने की विरासत से मिली खेती की सीख को पॉलीहाउस, हाईटेक नर्सरी और वैज्ञानिक प्रबंधन तक पहुंचाकर आयुष अग्रवाल ने यह संदेश दिया है कि खेती यदि ज्ञान, तकनीक और बाजार की समझ के साथ की जाए तो यह केवल रोजी-रोटी का साधन नहीं, बल्कि बड़े व्यवसाय और सम्मानजनक आय का माध्यम भी बन सकती है।
अब इस मॉडल का अगला पड़ाव कृषि पर्यटन और किसान प्रशिक्षण है। यदि फार्म हाउस को प्रस्तावित तरीके से विकसित किया जाता है तो आने वाले दिनों में यह पीलीभीत में ‘खेत में सीखो और खेत से कमाओ’ की अवधारणा को साकार करने वाला प्रमुख केंद्र बन सकता है।