चेन्नई | तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने रविवार को ‘भाषा शहीद दिवस’ के अवसर पर एक बार फिर हिंदी विरोधी रुख को स्पष्ट किया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि तमिलनाडु में हिंदी थोपने की किसी भी कोशिश के लिए न तो पहले कोई जगह थी, न आज है और न ही भविष्य में कभी होगी।
भाषा शहीदों को दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री स्टालिन ने 1930 और 1960 के दशकों में हुए हिंदी-विरोधी आंदोलनों के दौरान अपनी जान गंवाने वाले “भाषा शहीदों” को याद किया। उन्होंने कहा कि इन शहीदों का बलिदान तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव की रक्षा का प्रतीक है।
भाषण के मुख्य बिंदु:
एकजुट संघर्ष: स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु ने अपनी भाषा से अपने जीवन की तरह प्रेम किया है। राज्य ने हिंदी थोपे जाने के खिलाफ हमेशा एकजुट होकर संघर्ष किया है।”
निरंतर विरोध: उन्होंने केंद्र सरकार को संकेत देते हुए कहा कि जब-जब राज्य पर हिंदी थोपने की कोशिश की गई, तब-तब उसी तीव्रता और शक्ति के साथ इसका विरोध किया गया है।
तमिल अस्मिता: CM ने स्पष्ट किया कि द्रमुक सरकार तमिल भाषा की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगी।
क्या है ‘भाषा शहीद दिवस’?
तमिलनाडु में हर साल 25 जनवरी को उन प्रदर्शनकारियों की याद में ‘भाषा शहीद दिवस’ मनाया जाता है, जिन्होंने 1965 में केंद्र सरकार द्वारा हिंदी को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाने के फैसले के खिलाफ हुए हिंसक आंदोलनों में अपनी जान दी थी। इन आंदोलनों के कारण ही अंततः केंद्र को भाषाई नीति में बदलाव करना पड़ा था।