पीलीभीत। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश मेडिकल सेल्स रिप्रेजेंटेटिव संगठन पीलीभीत इकाई ने अपनी ज्वलंत मांगों को लेकर हुंकार भरी। शुक्रवार को संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने श्रम अधिकारी से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों के शोषण को रोकने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई। ज्ञापन में प्रमुख रूप से चार नए श्रम कानूनों को निरस्त कर 1976 के अधिनियम के तहत पुराने श्रम कानूनों को बहाल रखने की अपील की गई। संगठन ने पुरजोर तरीके से मांग की कि सेल्स प्रमोशन एंप्लॉई के लिए न्यूनतम वेतन 26,910 रुपये घोषित किया जाए और उनके कार्यक्षेत्र में 8 घंटे की समय सीमा निर्धारित की जाए।

संगठन ने अपनी मांगों के माध्यम से नियोक्ताओं द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न पर भी निशाना साधा। ज्ञापन में सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों की छंटनी और अनावश्यक स्थानांतरण पर तत्काल रोक लगाने, इलेक्ट्रिक गैजेट्स के माध्यम से की जा रही डिजिटल निगरानी को बंद करने और कर्मचारियों को बोनस, चिकित्सा देखभाल सहित सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई। इसके अलावा, कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF) अधिनियम 1952 के कड़ाई से पालन और सरकारी अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स को सुचारू रूप से कार्य करने की अनुमति देने पर बल दिया गया।
प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन की एकजुटता साफ दिखाई दी। इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष हितेश शुक्ला, सचिव प्रभात तिवारी, वाइस प्रेसिडेंट रवि प्रकाश, सहसचिव अनंत द्विवेदी और विकास गंगवार प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इनके साथ ही सुनील सिंह, सुनील प्रजापति, आशीष दीक्षित, दलजीत सिंह, सचिन सक्सेना, मोहम्मद इमदाद, मनोज वर्मा, श्रीकांत राठौर, सचिन अवस्थी, सुदर्शन और नन्हेलाल वर्मा सहित दर्जनों सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर ट्रेड यूनियन अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लिया।
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