पीलीभीत। पूरनपुर के ग्राम बूंदीभूड में शराब की दुकान खोलने का विरोध कर रही महिलाओं पर हुए लाठीचार्ज और कानूनी कार्रवाई के बाद मामला गरमा गया है। शुक्रवार को भाकपा माले के दो सदस्यीय जांच दल ने गांव का दौरा कर पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की। जांच दल में शामिल जिला प्रभारी अफरोज आलम और ब्लॉक सचिव कामरेड देवीदयाल ने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताया। नेताओं ने आरोप लगाया कि 15 अप्रैल से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रही महिलाओं पर तहसीलदार और पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा लाठीचार्ज किया गया, जिसमें 10 महिलाएं घायल हुई हैं। विडंबना यह है कि घायल महिलाओं का इलाज कराने के बजाय प्रशासन ने उन पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया है।
पार्टी जिला प्रभारी अफरोज आलम ने जारी प्रेस बयान में कहा कि बूंदीभूड की महिलाएं पिछले 22 दिनों से गांव में शराब की दुकान न खोलने की मांग को लेकर संघर्ष कर रही थीं। इस संबंध में वे तीन बार जिलाधिकारी से भी मिल चुकी थीं, जिस पर उन्हें केवल आश्वासन मिला। कल पुलिस और आबकारी विभाग ने जबरन दुकान खुलवाने का प्रयास किया, जिसका विरोध करने पर बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया। माले नेताओं ने कहा कि एक तरफ भाजपा सरकार ‘महिला वंदन’ का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ हक की आवाज उठाने वाली महिलाओं पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।

भाकपा माले ने चेतावनी दी है कि वे महिलाओं पर किए गए अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पार्टी का प्रतिनिधिमंडल कल जिलाधिकारी से मिलकर गांव से शराब की दुकान तुरंत हटाने, महिलाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और लाठीचार्ज के दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग करेगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक महिलाओं को न्याय नहीं मिलता और शराब की दुकान का फैसला निरस्त नहीं होता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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