​पीलीभीत। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा वित्तीय अपराधों और कर चोरी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पीलीभीत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक पीलीभीत के कुशल निर्देशन में थाना माधोटांडा पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण की मदद से फर्जी फर्में बनाकर बड़े पैमाने पर जीएसटी (GST) चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने इस धोखाधड़ी और जालसाजी में संलिप्त दिल्ली निवासी चार शातिर अभियुक्तों को माधोटांडा थाना क्षेत्र से सुबह करीब 08:15 बजे गिरफ्तार किया है। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान हरिओम (उम्र 29 वर्ष), विपिन जैन (उम्र करीब 42 वर्ष), दीपक चौधरी (उम्र करीब 39 वर्ष) और बच्चू (उम्र करीब 39 वर्ष) के रूप में हुई है, जो सभी स्वरूपनगर, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के निवासी हैं। इन अभियुक्तों की गिरफ्तारी थाना माधोटांडा पर पूर्व में पंजीकृत मु0अ0सं0 211/2025 के तहत की गई है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2)(ए) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की धारा 66(सी) लागू हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से अपराध में प्रयुक्त होने वाले 06 मोबाइल फोन, 09 सिम कार्ड और फर्जी फर्मों के संचालन व पंजीकरण से संबंधित 15 जीमेल आईडी सहित कई आवश्यक वित्तीय दस्तावेज बरामद किए हैं। इस मामले में प्रकाश में आया एक अन्य सह-अभियुक्त चंदन मिश्रा वर्तमान में जनपद मैनपुरी के कारागार में न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्ध है।
​पुलिस द्वारा की गई विस्तृत पूछताछ में इस संगठित गिरोह के काम करने के तौर-तरीकों का बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह गिरोह समाज के गरीब, सीधे-साधे और भोले-भाले आम लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन और वित्तीय लाभ का झांसा देकर जाल में फंसाता था। आरोपी इन लोगों को विश्वास में लेकर उनके महत्वपूर्ण निजी दस्तावेज जैसे— आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल व अन्य पहचान पत्र प्राप्त कर लेते थे और चालाकी से उनके मोबाइल पर आने वाले ओटीपी को भी हासिल कर लेते थे। इन चुराए गए असली दस्तावेजों और ओटीपी का दुरुपयोग करके आरोपी जीएसटी पोर्टल पर ऑनलाइन जाकर फर्जी फर्मों और फर्जी कंपनियों का पंजीकरण करा लेते थे। इस सिंडिकेट के भीतर काम का स्पष्ट विभाजन था।गिरोह के कुछ तकनीकी रूप से सक्षम सदस्य जीएसटी पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का काम संभालते थे, जबकि अन्य सदस्य इन फर्जी फर्मों से संबंधित जाली व्यापारिक और प्रशासनिक दस्तावेज तैयार कर उन्हें विभिन्न माध्यमों से आगे उपलब्ध कराने का नेटवर्क चलाते थे।
​जीएसटी विभाग से इन फर्जी फर्मों को अनुमोदित कराने के बाद, यह गिरोह कागजों पर ही बड़ी चालाकी से करोड़ों रुपये का फर्जी व्यापारिक लेन-देन (बोगस बिलिंग) प्रदर्शित करता था। इसके बाद यह गिरोह प्रत्येक फर्जी फर्म के बदले एक मोटी निर्धारित धनराशि (कमीशन) वसूल कर उन फर्मों को अन्य इच्छुक व्यक्तियों या व्यापारियों को बेच देता था। इन फर्जी कंपनियों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट हड़पने और टैक्स चोरी जैसी गंभीर अनियमित गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जिससे आरोपी अवैध रूप से भारी आर्थिक लाभ अर्जित कर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में से विपिन जैन का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है, जिसके विरुद्ध पूर्व में जनपद ललितपुर के साइबर क्राइम थाने में भी धोखाधड़ी, कूटरचना और आईटी एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं (मु0अ0सं0 08/2024) के तहत मुकदमा दर्ज है।
​इस बड़े अंतरराज्यीय कर चोरी घोटाले का पर्दाफाश करने और आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने में पीलीभीत पुलिस की संयुक्त टीम ने सराहनीय भूमिका निभाई है। इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) के प्रभारी निरीक्षक मृदुलकान्त शुक्ला, थाना माधोटांडा के उप-निरीक्षक मो० सैफ, साइबर सेल के महिला आरक्षी अनुज कुमार, अपराध शाखा के कांस्टेबल समीर, तथा थाना माधोटांडा के कांस्टेबल रूपक, रिक्रूट कांस्टेबल प्रिंस और रिक्रूट कांस्टेबल सौरभ तोमर शामिल रहे। पुलिस ने सभी गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक विधिक कार्यवाही करते हुए उन्हें माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया है और गिरोह के अन्य कड़ियों की तलाश की जा रही है।

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