नई दिल्ली। देश में आगामी चुनाव परिणामों की गणना (Counting) से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग (Election Commission) के उस निर्णय में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही मतगणना पर्यवेक्षक (Counting Observers) के रूप में नियुक्त करने की बात कही गई है।

निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र का सम्मान

न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अधिकारियों का चयन और नियुक्ति पूरी तरह से निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र का मामला है। अदालत ने निर्देश दिया कि आयोग के मौजूदा दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि हर मतगणना केंद्र पर पहले से ही पर्याप्त एजेंट और पर्यवेक्षक मौजूद रहते हैं, ऐसे में आयोग के प्रक्रियात्मक फैसलों में कोर्ट का दखल उचित नहीं है।

रिटर्निंग ऑफिसर और राज्य सरकार की भूमिका

आयोग के वकील ने अदालत में स्पष्ट किया कि निर्वाचन की प्रक्रिया में रिटर्निंग ऑफिसर (RO) राज्य सरकार के ही कर्मचारी होते हैं और अन्य आवश्यक अधिकारियों की नियुक्ति की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। केवल पर्यवेक्षकों की श्रेणी के लिए केंद्रीय कर्मचारियों का चयन एक प्रशासनिक निर्णय है।

CCTV फुटेज को लेकर बड़ा निर्देश

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की। इस पर:

  • आयोग ने अदालत को आश्वस्त किया कि सभी मतगणना केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएगी।
  • न्यायालय ने आयोग के परिपत्र (Circular) का अक्षरशः (Letter and Spirit) पालन करने के निर्देश दिए।

TMC के लिए क्या हैं मायने?

तृणमूल कांग्रेस ने आयोग के इस कदम को भेदभावपूर्ण बताते हुए चुनौती दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद आयोग की पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी। यह फैसला चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थानों की स्वायत्तता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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