चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब अभिनेता से नेता बने Vijay ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में सिर्फ सत्ता परिवर्तन ही नहीं, बल्कि राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर भी बड़ा राजनीतिक संदेश देखने को मिला।
शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और फिर तमिलनाडु का राजकीय गान ‘तमिल थाई वाज़्थु’ गाया गया। यह क्रम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin के कार्यकाल में सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ को लेकर विवाद होता रहा था।
दरअसल, केंद्र सरकार ने हाल ही में नई गाइडलाइंस जारी करते हुए सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पूरे छह छंदों वाले संस्करण को गाने पर जोर दिया था। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों और कई नेताओं ने आपत्ति जताई थी।
समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi भी मंच पर मौजूद थे और उन्होंने सभी के साथ खड़े होकर ‘वंदे मातरम’ तथा राष्ट्रगान गाया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा शुरू हो गई।
‘वंदे मातरम’ गीत को प्रसिद्ध साहित्यकार Bankim Chandra Chattopadhyay ने वर्ष 1882 में लिखा था। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद इसे लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई थी।
फरवरी में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इस निर्देश का विरोध करते हुए कहा था कि Rabindranath Tagore द्वारा लिखे गए राष्ट्रगान को ‘वंदे मातरम’ के बाद नहीं बजाया जाना चाहिए।
तमिलनाडु में भी पहले ‘तमिल थाई वाज़्थु’ और राष्ट्रगान को लेकर राज्य सरकार तथा राज्यपाल R. N. Ravi के बीच कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी थी। ऐसे में विजय सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम’ को प्राथमिकता दिए जाने को बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
समारोह के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने इसे “नई राजनीति की शुरुआत” बताया, जबकि विपक्षी समर्थकों ने इसे राजनीतिक संदेश देने की कोशिश करार दिया।