पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में ऑनलाइन लोन दिलाने के नाम पर डेटा चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) पीलीभीत ने मोहल्ला लोहामंडी निवासी संजीव वर्मा के विरुद्ध धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामलों में मुकदमा पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना करने का आदेश थाना कोतवाली प्रभारी को दिया है। न्यायालय ने यह कदम तब उठाया जब शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आरोपी ने लोन दिलाने के बहाने उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर विभिन्न वित्तीय संस्थानों से उनके नाम पर अवैध रूप से ऋण निकाल लिया।
मामले की जानकारी देते हुए शिकायतकर्ताओं के अधिवक्ता शम्स विकास ने बताया कि मोहल्ला खकरा निवासी संध्या सक्सेना के पति प्रदीप सक्सेना और एक अन्य व्यक्ति उमाशंकर ने लोन प्राप्त करने के उद्देश्य से संजीव वर्मा से संपर्क किया था। संजीव वर्मा ने ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर दोनों पीड़ितों के मोबाइल फोन, फोटो और अन्य आवश्यक पहचान दस्तावेज प्राप्त कर लिए। शुरुआत में उसने उन्हें लोन दिला भी दिया, लेकिन बाद में पीड़ितों को यह जानकर गहरा आघात लगा कि आरोपी ने उनके फोन और डेटा का अवैध उपयोग कर कई अन्य ऑनलाइन वित्तीय संस्थाओं से उनके नाम पर और भी लोन निकाल लिए हैं। जब पीड़ितों ने संजीव वर्मा से इस धोखाधड़ी के बारे में पूछताछ की, तो उसने स्वीकार किया कि निजी जरूरत के कारण उसने पैसे निकाले हैं और वह जल्द ही इसे वापस कर देगा, लेकिन लंबे समय तक उसने कोई धनराशि वापस नहीं की।
न्याय पाने के लिए पीड़ितों ने कई बार स्थानीय थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर काटे, लेकिन पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। अंततः शिकायतकर्ताओं ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कोतवाली पुलिस को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए थे, परंतु पुलिस प्रशासन जांच करने में आनाकानी करता रहा। न्यायालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी के विरुद्ध सख्त टिप्पणी की और लिखित नोटिस जारी कर चेतावनी दी कि यदि जांच नहीं की गई तो इसे अनुशासनहीनता और कर्तव्य में लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। न्यायालय के इस कड़े रुख के बाद पुलिस ने प्राथमिक जांच की, जिसमें ऑनलाइन ठगी की पुष्टि हुई। रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद, न्यायालय ने थाना प्रभारी को सात दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज कर इसकी प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करने और विवेचना की आख्या सौंपने के आदेश जारी किए हैं।