​पीलीभीत। स्थानीय ललित हरि राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद कॉलेज में भारतीय चिकित्सा पद्धति के गौरवमयी इतिहास को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर कसने और आयुर्वेदिक औषधियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विश्व आयुर्वेद परिषद (शिक्षक प्रकोष्ठ), उत्तर प्रदेश एवं कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय संगोष्ठी का विषय ‘फार्माकोविजिलेंस फॉर आयुर्वेदिक ड्रग्स: रीसेंट एडवांसेज एंड फ्यूचर पर्सपेक्टिव्स’ रहा। इस गरिमामयी आयोजन ने न केवल जनपद बल्कि संपूर्ण प्रदेश के आयुर्वेद जगत में शोध, सुरक्षा और वैज्ञानिक मानकों के नए आयाम स्थापित किए हैं।


​कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. केवल कृष्ण ठकराल, प्रो. योगेश चंद्र मिश्र, प्रो. आर. के. तिवारी, प्रो. नम्रता जोशी और कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुदीप सहाय बेदार सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा भगवान धन्वंतरि के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. सुदीप सहाय बेदार ने छात्र-छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए स्पष्ट किया कि हालांकि आयुर्वेद को सदियों से सुरक्षित माना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान समय में प्रतिकूल प्रभावों (ADR) की घटनाओं को देखते हुए ‘फार्माकोविजिलेंस’ अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने इसे आयुर्वेद की वैज्ञानिक प्रामाणिकता को वैश्विक स्तर पर सिद्ध करने के लिए एक अनिवार्य कदम बताया।


​तकनीकी सत्रों के दौरान देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने अपने शोधपरक विचार साझा किए। बीएचयू वाराणसी की प्रो. नम्रता जोशी ने आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा मानकों की महत्ता पर प्रकाश डाला, वहीं रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज की प्रो. अंजू सक्सेना ने आयुर्वेदिक एवं आधुनिक दवाओं के परस्पर प्रभाव और तर्कसंगत औषधि उपयोग पर जोर दिया। इसके साथ ही ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद, नई दिल्ली के प्रो. गालिब ने आयुष औषधियों के लिए फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम की उपयोगिता और उनकी विश्वसनीयता पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।


​आयोजन के अंतिम चरण में एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पीजी और यूजी छात्रों ने विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस सफल आयोजन को सफल बनाने में आयोजन समिति के सचिव डॉ. रमेश कुमार गुप्ता, संयोजक डॉ. राजीव नारायण बिलास और डॉ. हरी शंकर मिश्र सहित डॉ. देवकी नंदन शर्मा, डॉ. दिब्याभ और समस्त कॉलेज स्टाफ व छात्रों का विशेष योगदान रहा। स्थानीय चिकित्सकों और शैक्षणिक हस्तियों की उपस्थिति में संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने आयुर्वेद की सुरक्षा और गुणवत्ता के प्रति एक नई चेतना जागृत करने का कार्य किया है।

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