पीलीभीत। जनपद में किसानों की विभिन्न समस्याओं और एक कृषक पर कथित रूप से दर्ज किए गए फर्जी मुकदमे के विरोध में बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। प्रदेश के पूर्व खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री हेमराज वर्मा की अगुवाई में भारी संख्या में जुटे किसानों ने शासन-प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के पश्चात राज्यपाल को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट विजयवर्धन तोमर को सौंपा गया, जिसमें किसानों के उत्पीड़न को रोकने और उनके आर्थिक संकट के समाधान की मांग की गई है।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने प्रशासन पर राजनैतिक द्वेषभावना से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ग्राम अण्डरायन निवासी किसान ललित वर्मा पर राजनैतिक दबाव में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत दर्ज किया गया मुकदमा पूरी तरह निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान ने केवल सिंचाई और जुताई के उद्देश्य से डीजल रखा था, जिसे जिला पूर्ति विभाग के निरीक्षक ने गलत तरीके से पेश कर फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया। पूर्व मंत्री ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर मुकदमे को तत्काल निरस्त करने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि किसानों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो वे एक बड़े जन-आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

ज्ञापन के माध्यम से जनपद के किसानों की अन्य ज्वलंत समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने खाद की भारी किल्लत, ग्रीष्मकालीन फसलों के बर्बाद होने के खतरे और चीनी मिलों पर बकाया ₹253 करोड़ के गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। इसके साथ ही, मौसम की मार के कारण गेहूं की पैदावार में आई गिरावट के लिए मुआवजे, सरकारी क्रय केंद्रों पर तौल में हो रही देरी और बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। किसानों का कहना है कि स्मार्ट मीटरों के कारण आ रहे बेतहाशा बिल और भीषण गर्मी में बिजली कटौती ने उनकी कमर तोड़ दी है। साथ ही, वर्ष 2024-25 में घोषित केसीसी (KCC) पर 5 लाख रुपये की छूट को अब तक लागू न किए जाने पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया।