जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सिवनी गांव में एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक बंदर ने अपनी मां की गोद में खेल रही महज 20 दिन की बच्ची को झपट लिया और उसे पास के एक गहरे कुएं में फेंक दिया। हालांकि, कुदरत के करिश्मे और एक नर्स की त्वरित कार्रवाई ने मासूम को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

डायपर बना ‘लाइफ जैकेट’, पानी में तैरती रही मासूम
मिली जानकारी के अनुसार, नैला थाना क्षेत्र के निवासी अरविंद राठौर की पत्नी अपनी बेटी को गोद में लेकर बैठी थीं, तभी अचानक एक बंदर आया और पलक झपकते ही बच्ची को छीनकर भाग गया। ग्रामीणों ने बंदर का पीछा किया, लेकिन बंदर ने बच्ची को कुएं में गिरा दिया। चमत्कारिक रूप से, बच्ची ने जो डायपर पहन रखा था, वह पानी में ‘लाइफ जैकेट’ की तरह काम कर आया, जिससे बच्ची पूरी तरह डूबी नहीं और पानी की सतह पर तैरती रही।

नर्स राजेश्वरी बनीं ‘देवदूत’, CPR से लौटाईं सांसें
ग्रामीणों ने बाल्टी की मदद से बच्ची को कुएं से बाहर निकाला, लेकिन तब तक बच्ची काफी पानी पी चुकी थी और उसकी सांसें थमने लगी थीं। इसी बीच गांव में कथा सुनने आई नर्स राजेश्वरी राठौर मौके पर पहुँचीं। उन्होंने बिना देरी किए बच्ची को तुरंत सीपीआर (CPR) देना शुरू किया। कुछ ही देर में बच्ची रोने लगी और उसकी सांसें वापस लौट आईं। यह देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

पिता की अपील: बच्चों की सुरक्षा को लेकर रहें सतर्क
मड़वा पावर प्लांट में कार्यरत बच्ची के पिता अरविंद राठौर ने इस घटना पर दुख और राहत जताते हुए कहा कि बंदरों का आतंक पहले भी था, लेकिन ऐसी घटना पहली बार हुई है। उन्होंने नर्स और ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए सभी माता-पिता से अपील की है कि वे छोटे बच्चों को कभी भी असुरक्षित न छोड़ें।

वर्तमान में बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन इस घटना ने पूरे इलाके में वन्यजीवों के बढ़ते आतंक और सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।


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