पीलीभीत। भाकपा माले के जिला सचिव व राज्य कमेटी सदस्य देवाशीष राय ने प्रेस को जारी एक बयान में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुनर्वासन व उपनिवेशन योजना के तहत पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) और पूर्वांचल से लाकर बसाए गए हजारों विस्थापित किसान परिवारों के साथ सरकार दोहरी नीति अपना रही है। देवाशीष राय के अनुसार, ये परिवार दशकों से अपनी जमीन पर मालिकाना हक की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें हर साल केवल झूठे आश्वासन ही मिलते रहे हैं। हाल ही में पीलीभीत जनपद में हुए सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कुल 2,196 विस्थापित परिवारों की पहचान की है, जिनमें से 1,466 को मालिकाना हक देने का प्रचार तो किया गया, लेकिन शेष 730 परिवारों के बारे में जानकारी गोपनीय रखी गई है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर इन परिवारों को विस्थापितों की सूची से बाहर क्यों रखा जा रहा है।
चंदिया हजारा क्षेत्र की समस्याओं को उठाते हुए देवाशीष राय ने कहा कि पुनर्वासन योजना के तहत जो भूमि आवंटित की गई थी, उसे राजस्व अभिलेखों में दर्ज ही नहीं किया गया। वन विभाग का नाम हटाए बिना जमीन देना किसानों के साथ एक बड़ी धोखाधड़ी है, जिसके कारण आज भी किसान कानूनी उलझनों में फंसे हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अब चंदिया हजारा में किसानों को खाद देने पर भी रोक लगा दी गई है। इसी तरह नौजलहा और अन्य गांवों के विस्थापित परिवार भी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। पूर्वांचल से आए परिवारों के मालिकाना हक के सवाल पर भी सरकार ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। भाकपा माले ने स्पष्ट मांग की है कि चंदिया हजारा की आवंटित भूमि को तत्काल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए और सभी विस्थापितों समेत वर्षों से काबिज किसानों को मालिकाना हक की गारंटी दी जाए। मांगों को अनदेखा करने की स्थिति में पार्टी ने फिर से बड़ा जनांदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।