-डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री-
पीलीभीत। देश के विख्यात वन्यजीव प्रेमी और हाथी विशेषज्ञ डॉ. रूद्रदित्य का मानना है कि यदि मनुष्य प्रकृति और वन्यजीवों को प्रेम और संरक्षण प्रदान करे, तो बदले में प्रकृति भी उसे सुरक्षित रखती है। कर्नाटक के मूल निवासी डॉ. रुद्रादित्य पिछले दो महीनों से पीलीभीत टाइगर रिजर्व और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हाथियों से बचाव और उनके व्यवहार को समझने के लिए सक्रिय हैं। शनिवार को टाइगर रिजर्व के प्रभागीय कार्यालय में वार्ता करते हुए उन्होंने हाथियों की विशेषताओं और उनसे जुड़ी सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हाथी स्वभाव से हमलावर नहीं होता, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों और रंगों, विशेषकर सफेद कपड़ों को देखकर वह उत्तेजित हो जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने कर्नाटक की दुखद घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय वन सेवा के अधिकारी मणिकंदन और एक अन्य डॉक्टर को सफेद कपड़े पहने होने के कारण ही हाथियों के कोप का भाजन बनना पड़ा था।
डॉ. रुद्रादित्य ने हाथियों की विलक्षण स्मरण शक्ति और सूंघने की क्षमता के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हाथी सुगंध से अपने दोस्त और दुश्मन की पहचान कर लेता है। यदि किसी व्यक्ति ने उसे कभी सताया हो, तो उसकी छवि और सुगंध हाथी की स्मृति में दर्ज हो जाती है और सामने आने पर वह हमलावर हो जाता है। इसके विपरीत, प्यार और दुलार मिलने पर वह व्यक्ति की सुगंध को पहचानने लगता है और संकट के समय साथ खड़ा होता है। ग्रामीणों को हाथियों से बचाने के उपायों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कच्चे घरों के आसपास फिनाइल का छिड़काव करने से हाथी उसकी तीक्ष्ण गंध के कारण पास नहीं फटकते। इसके अतिरिक्त, टिन के डिब्बे में कंडा सुलगकर उस पर मिर्च का पाउडर डालने से जो गंध हवा के जरिए हाथियों तक पहुंचती है, वह उन्हें वहां से हटने पर मजबूर कर देती है। उन्होंने बताया कि महुआ क्षेत्र में इस प्रयोग का सफल परीक्षण किया गया, जिससे आसपास घूम रहे हाथी दूर चले गए।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सुंदरता और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए डॉ. रुद्रादित्य ने कहा कि यहाँ का जंगल अत्यंत खूबसूरत है। हालांकि, इसे अब तक वह वैश्विक पहचान और प्रमोशन नहीं मिल सका है जिसका यह हकदार है, लेकिन आने वाले समय में यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाएगा। उन्होंने अंत में इस बात पर जोर दिया कि वन्यजीवों को दुश्मन मानने के बजाय उनसे प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। यदि हम आज प्रकृति को संरक्षित करने का संकल्प लेंगे, तो भविष्य में प्रकृति भी हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। डॉ.रुद्रादित्य का यह अभियान पीलीभीत के तराई क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव द्वंद्व को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डॉ रुद्रादित्य ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभावी बना अधिकारी मनीष सिंह के प्रयासों को सराहा और कहा कि उनके प्रयास से पीलीभीत टाइगर रिजर्व निरंतर प्रगति कर रहा है।
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