नई दिल्ली | देश के करोड़ों स्वास्थ्य बीमा धारकों को बड़ी राहत दिलाने के उद्देश्य से गुरुवार, 02 अप्रैल को राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण मांग उठाई गई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SCP) की सांसद फौजिया खान ने शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान स्वास्थ्य बीमा कंपनियों की मनमानी और सख्त नियमों में ढील देने का मुद्दा पुरजोर तरीके से रखा।

एक गलती और वर्षों की मेहनत शून्य

सांसद फौजिया खान ने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति वर्षों से समय पर प्रीमियम भर रहा है, लेकिन किसी कारणवश एक बार प्रीमियम भरने में चूक (Default) हो जाती है, तो उसके द्वारा पिछले वर्षों में अर्जित सभी लाभ (जैसे नो क्लेम बोनस और पुरानी बीमारियों का कवर) शून्य हो जाते हैं। कंपनियां बीमा को बिल्कुल नए सिरे से शुरू करती हैं और कई मामलों में दोबारा मेडिकल टेस्ट कराने का दबाव भी डालती हैं।

सांसद की तीन प्रमुख मांगें:

  1. रियायत अवधि (Grace Period) में विस्तार: प्रीमियम भुगतान के लिए मिलने वाली 30 दिन की रियायत अवधि को बढ़ाकर 90 दिन किया जाए।
  2. लाभों का निलंबन, समाप्ति नहीं: प्रीमियम न भरने की स्थिति में संचित लाभों को स्थायी रूप से खत्म करने के बजाय केवल अस्थायी रूप से निलंबित किया जाना चाहिए।
  3. 180 दिन का सुरक्षा चक्र: प्रीमियम भुगतान के 180 दिनों के भीतर पॉलिसीधारक के सभी पुराने लाभों को अनिवार्य रूप से पुनर्स्थापित (Restore) किया जाए।

IRDAI को निर्देश देने की अपील

सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करे। उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक तंगी या किसी आपात स्थिति के कारण प्रीमियम में देरी होने पर आम आदमी को उसके वर्षों के निवेश से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।

आम जनता पर क्या होगा असर?

यदि सरकार और नियामक इन सुझावों को स्वीकार करते हैं, तो मध्यम वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों को सबसे अधिक लाभ होगा। इससे न केवल बीमा कवर की निरंतरता बनी रहेगी, बल्कि कंपनियों द्वारा छोटी-छोटी गलतियों पर क्लेम खारिज करने या लाभ कम करने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा।


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