बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों पर एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि कोई भी कानून किसी व्यक्ति को अपने घर के अंदर प्रार्थना सभा आयोजित करने से नहीं रोक सकता। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि निजी परिसर में प्रार्थना करने के लिए प्रशासन से किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

मामला क्या था?
यह फैसला जांजगीर-चांपा जिले के दो निवासियों द्वारा दायर याचिका पर आया है। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस द्वारा जारी उन नोटिसों को चुनौती दी थी, जिनमें उन्हें अपने घरों के भीतर ईसाई प्रार्थना सभाएं आयोजित करने से मना किया गया था। पुलिस का तर्क था कि इन सभाओं के लिए अनुमति नहीं ली गई थी।

हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ:

  • संवैधानिक अधिकार: कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपने घर में शांतिपूर्वक प्रार्थना करने से रोकना कानून सम्मत नहीं है। इसके लिए किसी सरकारी विभाग या पुलिस की अनुमति अनिवार्य नहीं है।
  • ध्वनि प्रदूषण और कानून-व्यवस्था: अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इन सभाओं के कारण ध्वनि प्रदूषण होता है या सार्वजनिक शांति भंग होती है (कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है), तो संबंधित अधिकारी प्रचलित कानूनों के तहत उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • नोटिस पर रोक: कोर्ट के इस रुख से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है जिन्हें निजी धार्मिक आयोजनों के लिए स्थानीय प्रशासन या पुलिस के हस्तक्षेप का सामना करना पड़ रहा था।

निष्कर्ष:
हाई कोर्ट का यह आदेश स्पष्ट करता है कि जब तक निजी प्रार्थना सभाएं किसी तीसरे पक्ष या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित नहीं करतीं, तब तक राज्य उनमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता।


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