अगरतला। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने त्रिपुरा में मादक पदार्थों की तस्करी और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत तीन अलग-अलग आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किए हैं। इन मामलों में ईडी ने कुल 14 व्यक्तियों को आरोपी बनाया है और लगभग 6.85 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को फ्रीज व जब्त किया है।

मामला 1: कफ सिरप की तस्करी और अवैध कमाई
पहला मामला जिरानिया थाने से जुड़ा है, जहाँ मुख्य आरोपी लिटन साहा और उसके सहयोगियों पर कोडीन-आधारित कफ सिरप की तस्करी का आरोप है। ईडी की जांच में सामने आया कि तस्करी से कमाए गए अवैध धन को वैध दिखाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा लिया गया था।

मामला 2: गांजा जब्ती और पुलिस अधिकारी की संलिप्तता
दूसरे मामले ने विभाग की नींद उड़ा दी है क्योंकि इसमें एक सेवारत पुलिस अधिकारी, ध्रुव मजूमदार का नाम भी शामिल है। यह मामला उत्तरी त्रिपुरा के पानीसागर में 1,352 किलोग्राम सूखा गांजा और खोवाई जिले में 14,400 बोतल फेनसेडिल कफ सिरप की बरामदगी से जुड़ा है। इसमें देबब्रत डे और अपु रंजन दास को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है।

मामला 3: फर्जी खातों के जरिए करोड़ों का लेनदेन
तीसरा मामला 2020 से 2025 के बीच सक्रिय एक बड़े सिंडिकेट का है। ईडी के अनुसार, बिशु कुमार और कामिनी देबबर्मा गांजा तस्करी के मुख्य सरगना हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि विकास देववर्मा नामक व्यक्ति ने फर्जी बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन में उनकी मदद की थी, जिसे आरोपी ने स्वीकार कर लिया है।

ईडी का कड़ा रुख
ईडी की इस कार्रवाई से राज्य में मादक पदार्थों के अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। एजेंसी अब इन आरोपियों के नेटवर्क और अन्य संपत्तियों का पता लगाने में जुटी है ताकि ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ी जा सके।


(आधुनिक दुनिया को सभी स्थानों पर संवाददाताओं की आवश्यकता है। इच्छुक संपर्क करें- 8923815100 व्हाट्अप पर अपना नाम, स्थान, यदि कोई अनुभव है तो उसकी जानकारी और कहां से संवाददाता बनना चाहते हैं उस स्थान का नाम लिखें संपर्क करें। यदि आप पत्रकारिता सीखने के इच्छुक हैं, तो भी संपर्क कर सकते हैं।)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Site designed and maintained by Lalit Rastogi