पीलीभीत। सरकारी दफ्तरों में कार्यसंस्कृति सुधारने और समयबद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने गुरुवार सुबह कलेक्ट्रेट स्थित विभिन्न अनुभागों का औचक निरीक्षण किया। प्रातः 10:10 बजे हुई इस अचानक कार्रवाई से कार्यालयों में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ कोषाधिकारी कार्यालय, खाद्य विभाग और नजारत सहित कई पटलों पर कुल 30 अधिकारी व कर्मचारी अपनी सीटों से नदारद मिले, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनुपस्थित कर्मियों का वेतन रोकने और स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने सबसे पहले वरिष्ठ कोषाधिकारी कार्यालय की उपस्थिति पंजिका खंगाली, जहाँ लेखाकार राजेन्द्र कुमार, अंकुर अग्रवाल, आशुतोष मिश्रा, जितेन्द्र कुमार, अरविन्द कुमार, सहायक लेखाकार ठाकुर सिंह और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरिमोहन अनुपस्थित पाए गए। इस घोर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने वरिष्ठ कोषाधिकारी को निर्देशित किया कि ‘नो वर्क-नो पे’ के सिद्धांत पर इन सभी का आज का वेतन काटा जाए और कृत कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
निरीक्षण का सिलसिला आगे बढ़ा तो खाद्य विभाग और जिला पूर्ति कार्यालय में भी स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य विभाग में डीआई नेहा वैश, एफएसओ शान्तनु कुमार व सतीश कुमार अनुपस्थित मिले, वहीं पूर्ति कार्यालय में कनिष्ठ सहायक मुकेशो कुमारी गायब पाई गईं। इसी तरह संयुक्त कार्यालय के निरीक्षण में कैलाश चन्द्र राठौर, मेराज अहमद, संजीव सक्सेना, छेदालाल, हेमा गुप्ता समेत 13 लिपिक व कर्मचारी नदारद मिले। नजारत अनुभाग में भी वीरेन्द्र कुमार, विजय कुमार और प्रेम प्रकाश सहित 6 कर्मी ड्यूटी से बाहर थे। जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने संबंधित प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी दोषी कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए।