नई दिल्ली: भारत कल अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली भव्य परेड में इस वर्ष भारतीय सेना अपनी स्वदेशी तकनीक और आधुनिक मारक क्षमता का प्रदर्शन करेगी। इस बार की परेड में न केवल घातक हथियार प्रणालियां, बल्कि कई नई टुकड़ियाँ भी पहली बार देश के सामने कदमताल करेंगी।

स्वदेशी हथियारों का शक्ति प्रदर्शन

अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, परेड में मुख्य आकर्षण का केंद्र भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता होगी। इसमें निम्नलिखित सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन किया जाएगा:

सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर: गहन मारक क्षमता वाली यह रॉकेट प्रणाली पहली बार आकर्षण का केंद्र बनेगी।

ब्रह्मोस और आकाश: दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ और सतह से हवा में मार करने वाली ‘आकाश’ मिसाइल प्रणाली का प्रदर्शन होगा।

अर्जुन टैंक: भारत का मुख्य युद्धक टैंक (MBT) ‘अर्जुन’ अपनी ताकत का परिचय देगा।

पहली बार शामिल होंगे ‘भैरव कमांडो’ और ‘शक्तिबन’

सैन्य इतिहास में पहली बार कुछ विशेष इकाइयों को परेड का हिस्सा बनाया गया है:

भैरव लाइट कमांडो बटालियन: नवगठित इस कमांडो यूनिट का प्रदर्शन दुश्मन के दांत खट्टे करने की क्षमता को दर्शाएगा।

शक्तिबन रेजिमेंट: अपनी विशिष्ट सेवा के लिए जानी जाने वाली यह रेजिमेंट पहली बार कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी।

दुर्गम क्षेत्रों के साथी: ज़ांस्कर पोनी और बैक्ट्रियन ऊंट

सैन्य आधुनिकता के साथ-साथ इस बार भारत की पारंपरिक सैन्य ताकत की भी झलक मिलेगी। ऊंचे हिमालय क्षेत्रों में रसद पहुंचाने वाले ज़ांस्कर पोनी (घोड़े) और दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट पहली बार इस गौरवशाली परेड का हिस्सा बनेंगे।

विशेष: 2026 की यह परेड ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को समर्पित होगी, जिसमें सेना के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की झांकियों में सांस्कृतिक विविधता की भी झलक दिखेगी।

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