विधि संवाददाता, पीलीभीत। वाहन फाइनेंस कंपनी को करीब 18.82 लाख रुपये की कथित चपत लगाने के मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी देवदत्त की द्वितीय अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) रविंद्र कुमार ने मामले की गंभीरता और पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों व साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला थाना सुनगढ़ी में मुकदमा अपराध संख्या 473/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के अंतर्गत दर्ज है। इस संबंध में महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (पीलीभीत शाखा) के एरिया लीगल मैनेजर सचिन खंडूरी की ओर से तहरीर दी गई थी। आरोप है कि कंपनी ने वर्ष 2021 में जसवंत सिंह को वाहन (संख्या UP26 AK 9674) खरीदने के लिए फाइनेंस किया था। ऋण की भारी धनराशि बकाया होने के बावजूद धोखाधड़ी की नीयत से कंपनी के करीब 18,82,435 रुपये बकाया व पेनाल्टी का भुगतान नहीं किया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलीभगत कर कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरों व जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी एनओसी तैयार कराई और वाहन को किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करा दिया। अदालत में अभियोजन ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार कर कंपनी को आर्थिक क्षति पहुंचाने में शामिल रहा है। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपी का नाम एफआईआर में न होने और कोई आपराधिक इतिहास न होने की बात कहते हुए झूठा फंसाए जाने का तर्क दिया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद माना कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत का पर्याप्त आधार नहीं है और देवदत्त का अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।