विधि संवाददाता, पीलीभीत। करीब 11 वर्ष पूर्व बिना अनुमति जुलूस निकालने और पुलिस बल पर हमला, पथराव व नारेबाजी करने के चर्चित मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश महेन्द्र श्रीवास्तव की अदालत ने मामले की सुनवाई के पश्चात आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य व सबूत न पाए जाने पर उसे बरी (दोषमुक्त) करने का आदेश दिया।
अभियोजन कथानक के अनुसार, 23 दिसंबर 2015 को थाना सुनगढ़ी के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उस समय बारावफात के जुलूस के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उच्चाधिकारी, भारी पुलिस बल और पीएसी बल अल्ला हू मियां मजार व मद्दे की पुलिया के पास तैनात थे। आरोप था कि देर रात मोहम्मद हसन कदीरी, इरफान कदीरी, अयूब कदीरी सहित कई नामजद व 500 से 700 अज्ञात समर्थकों ने हाथों में झंडे-डंडे लेकर बिना प्रशासनिक अनुमति के अलग जुलूस निकालने का प्रयास किया। जिले में धारा 144 लागू होने और केवल पारंपरिक जुलूस की अनुमति होने का हवाला देकर जब अधिकारियों ने उन्हें रोका, तो भीड़ उग्र हो गई।
आरोप के मुताबिक, भीड़ ने पुलिस के बैरियर तोड़कर धक्का-मुक्की की और अधिकारियों व पुलिस बल पर झंडों के डंडों से हमला कर पथराव शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए नगर मजिस्ट्रेट के आदेश पर हल्का बल प्रयोग भी किया गया, जिसके बाद आसपास के मकानों से पुलिस पर जान से मारने की नियत से अवैध हथियारों से फायरिंग और पथराव का दावा किया गया था। इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर मोहल्ला मोहम्मद बासिल निवासी अब्दुल कदीर उर्फ सोनू के विरुद्ध अदालत में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह प्रस्तुत किए गए, जबकि आरोपी पक्ष ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। अपर सत्र न्यायाधीश महेन्द्र श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों की बहस सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अनुशीलन करने के बाद पाया कि आरोपी अब्दुल कदीर के खिलाफ अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। इसके आधार पर अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से दोषमुक्त घोषित कर दिया।