पीलीभीत। जनपद के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और खेती की नई तकनीकों से जोड़ने के लिए गन्ना विकास विभाग निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में सहकारी गन्ना विकास समिति मझोला के ग्राम कुलारा में विभाग द्वारा कृषक भ्रमण और तकनीकी निरीक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रगतिशील किसान जितेंद्र सिंह के खेत का विशेष रूप से अवलोकन किया गया, जिन्होंने गन्ने के साथ सहफसली खेती का एक उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत किया है। जितेंद्र सिंह ने मार्च माह में गन्ने की उन्नत किस्म CoLk 16202 की बुवाई 5 फीट की दूरी पर दोहरी पंक्ति विधि से की है और खाली जगह का सदुपयोग करते हुए गन्ने की दो लाइनों के बीच राजमा की दो पंक्तियां बोई हैं।
खेत के निरीक्षण के दौरान जिला गन्ना अधिकारी ने उपस्थित किसानों को सहफसली खेती के वैज्ञानिक और आर्थिक लाभों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गन्ने के साथ दलहनी फसलों जैसे राजमा, चना, मटर या मसूर की बुवाई करने से भूमि की उर्वरता में प्राकृतिक रूप से सुधार होता है। ये फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण का कार्य करती हैं, जिससे मुख्य फसल गन्ने को भी पोषण मिलता है। इसके अतिरिक्त, यह पद्धति गन्ने की प्रारंभिक अवस्था में किसानों को अतिरिक्त आय का एक मजबूत स्रोत प्रदान करती है, जिससे खेती की लागत निकालने में सुगमता होती है।
तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करते हुए अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सहफसली खेती न केवल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है, बल्कि यह कीट एवं रोग प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध होती है। बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने किसानों को महत्वपूर्ण सलाह दी कि गन्ने की बुवाई यथाशीघ्र पूरी कर लें। समय पर बुवाई करने से फसल उच्च तापमान के दुष्प्रभाव से बचती है। इसके साथ ही, वर्तमान मौसम को देखते हुए खेतों में समुचित नमी बनाए रखने और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार ही उर्वरक व सिंचाई प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर एल.एच. चीनी मिल के प्रतिनिधि और कई गणमान्य व्यक्तियों सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय किसान उपस्थित रहे। विभाग द्वारा आयोजित इस तकनीकी निरीक्षण का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से ऊपर उठाकर वैज्ञानिक पद्धतियों की ओर प्रेरित करना है, ताकि उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके और कृषि क्षेत्र को अधिक लाभप्रद बनाया जा सके। सहभागी किसानों ने भी इस नई तकनीक को अपनाने और आधुनिक कृषि विधियों को अपने खेतों में लागू करने के प्रति उत्साह दिखाया।
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