पीलीभीत। पीलीभीत बाघ संरक्षण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गढ़ा वन्यजीव गलियारे में स्थित गांवों—लालपुर, विधिपुर, नद्याह, जरी और शिवनगर दमगढ़ी—के किसानों को जैविक व टिकाऊ कृषि से जोड़ने के लिए एक विशेष पहल की शुरुआत की गई है। रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग से भूमि की घटती उर्वरता और बढ़ती कृषि लागत की समस्या को देखते हुए विश्व प्रकृति निधि-भारत द्वारा क्षेत्र के किसानों को केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके तहत 13 इच्छुक किसानों को उनके गड्ढों की क्षमता के अनुसार कुल 125 किलोग्राम केंचुआ पालन सामग्री (वर्मीकल्चर) उपलब्ध कराई गई।

इसी क्रम में लालपुर में आयोजित सहायता वितरण कार्यक्रम में पीलीभीत वन एवं वन्यजीव प्रभाग के निदेशक भरत कुमार डी.के. ने तैयार खाद को छानने की मशीन पारिस्थितिकी विकास समिति, लालपुर की टीम को सौंपी। उन्होंने विश्व प्रकृति निधि के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि खाद छानने व पैक करने की सुविधा से किसानों को खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय का जरिया मिलेगा। इस दौरान विश्व प्रकृति निधि भारत के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि केंचुआ खाद का पहला प्रयोग सफल रहा है और खाद बिक्री के लिए तैयार है। इच्छुक अन्य किसान लालपुर की पारिस्थितिकी विकास समिति के माध्यम से आवेदन कर वर्मीकल्चर प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान बाघ मित्रों में पक्षी संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु ‘Birds of India’ पुस्तक का वितरण भी किया गया। यह पहल मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और आजीविका संवर्धन में सहायक सिद्ध होगी।