सितारगंज। बैगुल जलाशय के आसपास बसे सैकड़ों भूमिहीन परिवारों ने वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत भूमि का मालिकाना हक दिए जाने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर चार-पांच पीढ़ियों से निवास कर रहे पात्र परिवारों को भू-स्वामित्व प्रदान करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने इस संबंध में देहरादून में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा और वन मंत्री सुबोध उनियाल से भी मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। दोनों मंत्रियों ने ग्रामीणों की बात सुनते हुए वन सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि गोठा, पंडरी, लौका, नकटा, गुरुनानक नगरी, बनकुइया और सिंधी डेरा समेत कई गांवों में सैकड़ों परिवार वर्ष 1945 से निवास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी अभिलेखों में इन गांवों का उल्लेख है तथा क्षेत्र में मंदिर, कुएं, पुलिया और अन्य प्राचीन संरचनाओं के अवशेष भी मौजूद हैं, जो उनके लंबे समय से बसे होने का प्रमाण हैं।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1960 के आसपास कई परिवारों को भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन बैगुल जलाशय परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। बाद में वर्ष 1975 में यह भूमि सिंचाई विभाग से वन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई। वर्तमान में यह भूमि राजस्व अभिलेखों में सिविल सोयम वर्ग-5(3) कृषि योग्य भूमि के रूप में दर्ज है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे दशकों से इस भूमि पर खेती-किसानी कर जीवनयापन कर रहे हैं और उनके पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, परिवार रजिस्टर समेत सभी आवश्यक सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं। क्षेत्र में सड़क, बिजली, पेयजल और विद्यालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि वनाधिकार अधिनियम-2006 के प्रावधानों के तहत पात्र परिवारों को भूमि का स्वामित्व प्रदान करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। उनका कहना है कि इससे सैकड़ों परिवारों को स्थायित्व मिलेगा और वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। इस दौरान अनिल राव, राजू गौतम, अमृतपाल सिंह, कश्मीर सिंह, राम आशीष, अजय राव, गोविंद, धर्मेंद्र कुमार, वीरेंद्र कुमार, सूरज नाथ समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।