विधि संवाददाता, पीलीभीत। अवैध संबंधों में बाधक बनने पर पति को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए विवश करने के मामले में जनपद एवं सत्र न्यायाधीश रवीन्द्र कुमार की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद पर्याप्त साक्ष्य न पाए जाने पर आरोपी पत्नी, सास और उसके प्रेमी सहित तीनों आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया है।
अभियोजन कथानक के अनुसार, वादी मुकदमा मोहम्मद अली खां ने 8 अक्टूबर 2016 को थाना बीसलपुर में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनके पुत्र शारिम अली का निकाह/कोर्ट मैरिज करीब छह वर्ष पूर्व दियोरिया कलां की शीबा के साथ हुआ था। निकाह के बाद से ही शीबा के अवैध संबंध बीसलपुर के हसन बख्श नाम के युवक से थे, जिसके चलते वह अक्सर शारिम को परेशान करती थी। उनके चार बच्चे भी हैं। आरोप था कि शीबा कई बार बिना बताए बच्चों को छोड़कर घर से चली जाती थी। 2 अक्टूबर 2016 की सुबह भी अवैध संबंधों को लेकर पति-पत्नी में कहासुनी हुई थी, जिसके बाद शीबा ने फोन करके अपनी मां शायना बानो उर्फ गुजरिया को बुला लिया।
तहरीर के मुताबिक, 3 अक्टूबर 2016 की शाम करीब पांच बजे पत्नी शीबा, प्रेमी हसन बख्श और मां शायना बानो ने मिलकर शारिम अली को बुरी तरह प्रताड़ित और बेइज्जत किया। साथ ही पत्नी द्वारा अपने अवैध संबंध न छोड़ने की धमकी दी गई। इस प्रताड़ना और अपमान से क्षुब्ध होकर शारिम अली ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया। घटना के बाद आरोपी मौके से भाग निकले। जानकारी होने पर पिता मोहम्मद अली खां अपने पुत्र को तुरंत सरकारी अस्पताल बीसलपुर ले गए, जहाँ हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे बरेली रेफर कर दिया। बरेली में इलाज के दौरान शारिम की मृत्यु हो गई और वहीं उसका पोस्टमार्टम कराया गया।
पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना पूरी की और आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह अदालत में पेश किए गए, वहीं बचाव पक्ष की ओर से भी दो गवाह प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों के विरुद्ध अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इसके आधार पर माननीय न्यायाधीश ने पत्नी शीबा, हसन बख्श और शायना बानो उर्फ गुजरिया को दोषमुक्त करने का आदेश जारी किया।