विधि संवाददाता,​ पीलीभीत। थाना सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में वर्ष 2022 में भाजपा के एक मंडल मंत्री पर हुए जानलेवा हमले और अवैध असलाह बरामदगी के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय सुनील कुमार ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। इसके साथ ही, मामले में झूठी कहानी और गवाही को लेकर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए वादी मुकदमा के विरुद्ध अलग से प्रकीर्ण वाद (विविध मुकदमा) दर्ज करने का आदेश पारित किया है। अदालत ने वादी के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तिथि नियत की है।
​अभियोजन कथानक के अनुसार, थाना सेहरामऊ उत्तरी में भाजपा के मंडल मंत्री रामकुमार सिंह ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 23 नवंबर 2022 की शाम करीब चार बजे वह चतीपुर गन्ना सेंटर पर अपनी ट्रैक्टर-ट्राली तुलवाने गए थे। सेंटर पर दोनों तरफ राजेंद्र शाह की ट्रालियां खड़ी थीं, जिससे रास्ता बाधित था। वादी ने अपने ट्रैक्टर को बैक करके किसी तरह अपनी ट्राली तुलवा ली, क्योंकि उनका नंबर पहले से था। जब इस बात का पता राजेंद्र शाह को चला, तो वह अपने साथियों अंगद शाह, अरुण, सुनील, मंकी और एक फोर व्हीलर के ड्राइवर के साथ पहले रामकुमार के घर पहुँचे और गालियां दीं। बाद में जब उन्हें पता चला कि वादी गन्ना सेंटर पर ही हैं, तो इन सभी लोगों ने सेंटर पर आकर उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने उनके सीने पर रिवाल्वर तान दी और जान से मारने की धमकी दी। वादी का आरोप था कि हमलावरों के पास तीन रिवाल्वर और अवैध तमंचे थे।
​इस मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी। इसी दौरान 28 अप्रैल 2023 (कथानक के अनुसार) को सुल्तानपुर चौकी क्षेत्र की सपहा पुलिया के पास चेकिंग के दौरान पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी करके एक संदिग्ध युवक को दबोचा। जामा तलाशी लेने पर उसके पास से एक 315 बोर का तमंचा और जिंदा कारतूस बरामद हुआ। पूछताछ में उसने अपना नाम अनुराग (निवासी ग्राम रायपुर कलां, थाना मोहम्मदी कोतवाली, जनपद लखीमपुर खीरी) बताया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कुबूल किया था कि उसने ही 23 नवंबर 2022 को गन्ना सेंटर पर रामकुमार सिंह की जान लेने की नीयत से फायर किया था, लेकिन गोली मिस हो गई थी। पुलिस ने बरामदगी के आधार पर आर्म्स एक्ट का अलग से मुकदमा दर्ज कर दोनों मामलों की चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी।
​न्यायालय ने दोनों पत्रावलियों को एक साथ जोड़कर मामले की सुनवाई की। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाह अदालत में पेश किए गए, वहीं आरोपी अनुराग ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। माननीय न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनने और पत्रावलियों पर मौजूद साक्ष्यों का गहन बारीकी से अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी अनुराग के विरुद्ध दोष साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं, जिसके आधार पर उसे दोषमुक्त कर दिया गया। वहीं, मामले की पृष्ठभूमि को देखते हुए अदालत ने वादी मुकदमा रामकुमार सिंह के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए प्रकीर्ण वाद दर्ज कर नोटिस जारी करने का आदेश दिया, जिसकी अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।

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