पीलीभीत/बीसलपुर। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट एवं निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों और एससी-एसटी एक्ट के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मंगलवार को उन्होंने पीलीभीत के यशवंतरी देवी मंदिर तथा बीसलपुर में आयोजित सम्मेलनों के दौरान सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी।
अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि उन्होंने 26 जनवरी को यूजीसी के नए प्रावधानों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित यूजीसी-2026 के नियम समाज में “बांटो और राज करो” की नीति को बढ़ावा देंगे। उनका कहना है कि इन नियमों से जातिगत भेदभाव बढ़ेगा और विश्वविद्यालयों में सामान्य वर्ग के छात्रों का उत्पीड़न आसान हो जाएगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ये नियम लागू हुए तो देश में ‘सिविल वॉर’ जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।
बीसलपुर में सनातनी समाज के सम्मेलन को संबोधित करते हुए अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए मांग की कि 7 फरवरी से पहले संसद का विशेष सत्र बुलाकर एससी-एसटी एक्ट को समाप्त किया जाए तथा यूजीसी के विवादित नए नियमों को तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 7 फरवरी से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि देश में “बेस्ट इंडिया कंपनी” चल रही है, जिसमें प्रधानमंत्री “सीईओ” और गृहमंत्री “एमडी” की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने ईडी की कार्यवाही पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष में शामिल होते ही कई मामलों में राहत मिल जाती है।
उन्होंने स्थानीय सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद पर भी प्रशासनिक शिथिलता को लेकर निशाना साधा। साथ ही कहा कि जो नेता अपने समाज की आवाज नहीं उठा पा रहे हैं, उन्हें जगाने के लिए “चूड़ियां और घुंघरू” भेजना चाहिए।
कार्यक्रमों की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया। साथ ही एलआईयू (LIU) की टीमें भी लगातार निगरानी करती रहीं। फिलहाल प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

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