पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (एएसएमसी) एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत का गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) उन्नत क्रिटिकल केयर सेवाओं और रोगी सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम. के कुशल नेतृत्व में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकीय कौशल के बेहतरीन समन्वय का ही परिणाम है कि पिछले मात्र पाँच महीनों के भीतर सेंट्रल वेनस कैथेटर (सेंट्रल लाइन) कैन्युलेशन प्रक्रियाओं की संख्या में रिकॉर्ड 10.6 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है. यह उन्नत जीवनरक्षक सुविधा शॉक, गंभीर निर्जलीकरण, सेप्सिस और अत्यंत कठिन वेनस एक्सेस वाले गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए एक विश्वसनीय और दीर्घकालिक जीवनरेखा साबित हो रही है. इसके तीन पृथक पोर्ट्स के माध्यम से गंभीर रोगियों का रक्तचाप बनाए रखने वाली दवाओं (इनोट्रोप्स), पोटेशियम इन्फ्यूजन तथा अन्य उच्च जोखिम वाली जीवनरक्षक औषधियों को बेहद सुरक्षित तरीके से एक साथ दिया जा रहा है, जिससे केंद्रीय शिरापरक दाब (सेंट्रल वेनस प्रेशर) की सटीक निगरानी भी संभव हो पा रही है.
रोगी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पीलीभीत मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में अब सेंट्रल लाइन की सभी जटिल प्रक्रियाएँ रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड गाइडेंस तकनीक के अंतर्गत की जा रही हैं. इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम. ने बताया कि अल्ट्रासाउंड तकनीक की मदद से त्वचा के भीतर की नसों और आंतरिक संरचनाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखना संभव हो जाता है. इससे यह प्रक्रिया न केवल अत्यधिक सुरक्षित और सटीक बनती है, बल्कि अनजाने में किसी धमनी में सुई लगने, आंतरिक रक्तस्राव होने या फेफड़ों को क्षति पहुँचने (न्यूमोथोरैक्स) जैसी जानलेवा जटिलताओं का जोखिम लगभग समाप्त हो जाता है. सबसे बड़ी चिकित्सीय उपलब्धि यह रही है कि स्थापना और रखरखाव के दौरान कठोर संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का अक्षरशः पालन करने के कारण अस्पताल प्रशासन अब तक ‘सेंट्रल लाइन एसोसिएटेड ब्लड स्ट्रीम इंफेक्शन’ (रक्त प्रवाह संक्रमण) की दर को शून्य प्रतिशत (0%) पर बनाए रखने में पूरी तरह सफल रहा है.
संक्रमण की इस पूर्ण रोकथाम से न केवल गंभीर रूप से बीमार रोगियों के जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ गई है, बल्कि चिकित्सा की कुल लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है. विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त प्रवाह संक्रमण का एक भी मामला रुकने से मरीजों को महंगे एंटीबायोटिक उपचार, अतिरिक्त जटिल जांचों और लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलती है. साथ ही यह तकनीक मरीजों को बहु-अंग विफलता (मल्टी-ऑर्गन फेल्योर) तथा खतरनाक एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध जैसी गंभीर चिकित्सा समस्याओं से बचाने में भी सहायक सिद्ध हुई है. इसके अतिरिक्त, आईसीयू ने आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए एक्सटर्नल जुगुलर वेन एक्सेस तथा अल्ट्रासाउंड-गाइडेड पेरिफेरल आईवी कैन्युलेशन की अत्याधुनिक सेवाओं का भी विस्तार किया है. इस नई व्यवस्था से उन गंभीर मरीजों को त्वरित राहत मिल रही है जिनकी नसें ढूँढना अत्यधिक कठिन होता है, जिससे उन्हें बार-बार दर्दनाक सुई चुभाने की जरूरत नहीं पड़ती और उपचार में होने वाला जानलेवा विलंब भी टल जाता है.

इस बड़ी सफलता के पीछे संस्थान की समर्पित चिकित्सकीय एवं नर्सिंग टीम का सतत कड़ा प्रशिक्षण और अटूट प्रतिबद्धता है, जहाँ सभी नर्सिंग अधिकारियों व डॉक्टरों को संक्रमण रोकथाम के नवीनतम वैश्विक मानकों की ट्रेनिंग दी गई है. इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने कहा कि हमारा आईसीयू अब देश के अग्रणी और शीर्ष कॉर्पोरेट व राष्ट्रीय चिकित्सा संस्थानों के समान उच्च सुरक्षा मानकों और तकनीकी दक्षता के साथ सेवा दे रहा है. डॉ. अरविंद और उनकी टीम का यह प्रयास सुनिश्चित कर रहा है कि पीलीभीत और इसके आसपास के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के आम जनमानस को स्थानीय स्तर पर ही सर्वोत्तम और विश्वस्तरीय क्रिटिकल केयर सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें. वहीं, संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. अरुण सिंह ने भी टीम की सराहना करते हुए कहा कि विशेषीकृत आधुनिक उपकरणों की सतत उपलब्धता और प्रशिक्षित बहु-विषयक टीम का यह अनूठा सहयोग रोगी सुरक्षा, चिकित्सा उत्कृष्टता और जनसेवा के प्रति पीलीभीत मेडिकल कॉलेज की दृढ़ प्रतिबद्धता का एक जीवंत प्रमाण है.