पीलीभीत। वन्यजीव संरक्षण के प्रति युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से पीलीभीत टाइगर रिजर्व द्वारा एक विशेष शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अनूठे अभियान के तहत जनपद के 10 प्रमुख विद्यालयों के लगभग 300 विद्यार्थियों को बाघों के संसार से रूबरू होने का अवसर मिला। यह भ्रमण उन मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए एक ‘पुरस्कार’ के रूप में आयोजित किया गया था, जिन्होंने पूर्व में आयोजित वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई थी।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डीके ने सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसे प्रत्यक्ष अनुभवों से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है, जिससे वे भविष्य में पर्यावरण प्रहरी के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे। जंगल सफारी के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल बाघ, चीतल, सांभर, काकड़ और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के दीदार किए, बल्कि दीमक की बांबी और घास के मैदानों के प्रबंधन जैसे तकनीकी विषयों पर भी विशेषज्ञों से जिज्ञासापूर्ण प्रश्न पूछे।

इस ‘जंगल की पाठशाला’ में विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने छात्र-छात्राओं को वनस्पतियों और पारिस्थितिकी तंत्र की बारीकियों से अवगत कराया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध चूका ईको-टूरिज्म स्थल का भी जमकर आनंद लिया। सफारी की समुचित व्यवस्था वन क्षेत्र अधिकारी सहेंद्र यादव द्वारा सुनिश्चित की गई। कार्यक्रम में अवध पब्लिक स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी, लायंस बाल विद्या मंदिर, कम्पोजिट विद्यालय नकसा व अशरफ खां, अंगूरी देवी बालिका विद्या मंदिर, रमलुभाई साहनी कॉलेज, ललित हरि आयुर्वेदिक कॉलेज, रानी अवंतीबाई और आर्य कन्या इंटर कॉलेज के शिक्षक व विद्यार्थी शामिल रहे।

उद्घाटन समारोह में प्रशिक्षु आईएफएस हिमांशु वावल, उप प्रभागीय अधिकारी रुद्रप्रताप सिंह सहित प्रमोद कुमार, सर्वेश कुमार और समाधान विकास समिति के समन्वयक लक्ष्मीकांत शर्मा जैसे गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का केंद्र रहा, बल्कि इसने पीलीभीत के भविष्य के कर्णधारों को अपनी प्राकृतिक विरासत को संजोने का एक नया दृष्टिकोण भी प्रदान किया।