विधि संवाददाता, पीलीभीत। जनपद के बहुचर्चित नकली नागमणि कांड और चरस तस्करी मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) अनु सक्सेना ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने चारों अभियुक्तों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और कुल 1.66 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले के एक अन्य मुख्य आरोपी की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो जाने के कारण उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन कथानक के अनुसार, यह मामला 10 मार्च 2007 का है। तत्कालीन एसआई पी.के. सिंह और एसओजी के कांस्टेबल आशुतोष राय को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जयसंतरी मुख्य मंदिर के पीछे कुछ बाहरी लोग असलहों से लैस होकर ‘नागमणि’ का सौदा करने की फिराक में हैं। पुलिस टीम ने जब मंदिर के पीछे दबिश दी, तो वहां पांच लोग संदिग्ध अवस्था में बैठे मिले, जो आपस में खरीदार के आने में हो रही देरी की चर्चा कर रहे थे। पुलिस ने घेराबंदी कर मौके से पांचों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।
नकली नागमणि और अवैध असलहे हुए थे बरामद
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान खीरी के थाना निघासन निवासी फारुख, थाना पूरनपुर के ग्राम शेरपुर निवासी लल्ला, जफर अली, छोटे और आरिफ उर्फ इसरार के रूप में हुई थी। तलाशी के दौरान इनके पास से कुल 850 ग्राम चरस, एक देसी तमंचा, तीन चाकू और वह कथित ‘नागमणि’ बरामद हुई, जो जांच में ‘संतोषी की गोली’ (नकली) पाई गई। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया था कि वे नकली नागमणि के नाम पर लोगों को ठगने का काम करते हैं और उनके पास आय का कोई अन्य वैध जरिया नहीं है।
न्यायालय की कार्यवाही और फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार शुक्ल ने अभियोजन की ओर से कई गवाह और ठोस साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। हालांकि आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया, लेकिन पत्रावली के अवलोकन और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने उन्हें दोषी पाया।
अदालत ने फारुख, लल्ला और जफर अली पर 43-43 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई। वहीं, चौथे अभियुक्त छोटे को 40 हजार रुपये जुर्माने के साथ पांच वर्ष की कैद की सजा दी गई। अधिवक्ता ने जानकारी दी कि मामले के पांचवें आरोपी आरिफ उर्फ इसरार की पत्रावली पहले ही अलग कर दी गई थी, जिसकी मृत्यु हो जाने के कारण उसके विरुद्ध चल रही कानूनी प्रक्रिया को उपशमित (बंद) कर दिया गया है।
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