विधि संवाददाता,​पीलीभीत। न्यायालय अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या-3) ने धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम (चेक अनादरण) के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के अभियुक्त जयपाल (पुत्र कुंवरसेन), निवासी ग्राम इटौरिया (थाना गजरौला, जनपद पीलीभीत) को दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। न्यायालय का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि चेक बाउंस के मुकदमों में केवल चेक का अनादृत होना ही सजा के लिए काफी नहीं है, बल्कि अभियोजन पक्ष को वैध लेन-देन और ऋण देयता को भी पुख्ता सबूतों से साबित करना होगा।
​मामले के अनुसार, परिवादी संस्था ‘मोटिव माइक्रो बेनिफिट फाउंडेशन’ ने अदालत में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि अभियुक्त जयपाल ने ऋण अदायगी के एवज में ₹1,00,000 का एक चेक जारी किया था। जब इस चेक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया, तो यह अनादृत (बाउंस) हो गया। इसके बाद संस्था द्वारा कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए धारा 138 एन.आई. एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था।
​अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने, गवाहों के बयानों और पत्रावली पर उपलब्ध दस्तावेजों का गहन अनुशीलन करने के बाद पाया कि परिवादी संस्था अभियुक्त के खिलाफ ऋण की वैध देयता और उससे जुड़े आवश्यक तथ्यों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रही। न्यायालय ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन का दावा पूरी तरह विश्वसनीय प्रतीत नहीं होता और अभियुक्त द्वारा उठाए गए विधिक संदेहों का परिवादी पक्ष उचित निराकरण नहीं कर सका। इन्हीं विधिक आधारों पर न्यायालय ने अभियुक्त जयपाल को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *